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MCC laws: मेरिलबोन क्रिकेट क्लब ने नियमों में किए बदलाव, इन मैचों में हुआ परिवर्तन; जानें कब से होंगे लागू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 03 Feb 2026 08:26 PM IST
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सार
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट के 73 नियम बदल दिए हैं। यह नियम इस साल अक्तूबर से लागू होंगे। आइए जानते हैं एमसीसी ने किन-किन नियमों में बदलाव किया है।
एमसीसी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इस साल क्रिकेट के कुछ नियम बदलने जा रहे हैं जिसका सबसे ज्यादा असर बहु-दिवसीय मैचों में होगा। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने 73 नियमों में बदलाव किए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बहु-दिवसीय मैचों के लिए बदलाव किए गए नियम की हो रही है। अभी तक अगर इन मैचों में दिन की अंतिम ओवर के दौरान विकेट गिरता है तो कई बार स्टंप्स की घोषणा हो जाती है, लेकिन अब इस स्थिति में भी पूरा खेलना अनिवार्य कर दिया गया है।
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अक्तूबर से लागू होंगे नियम
नए नियम इस साल अक्तूबर से लागू होंगे। एमसीसी ने कहा कि 2022 के बाद पहली बार जारी की गई लॉज ऑफ क्रिकेट की नई प्रति का मकसद नियमों को समय के अनुरूप और आधुनिक खेल के लिए अधिक समावेशी बनाना है। एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि बहु-दिवसीय मैचों में दिन का अंतिम ओवर अब हर हाल में पूरा कराया जाएगा। एमसीसी के अनुसार, ऐसा न होने से “खेल का रोमांच कम हो जाता है। एमसीसी ने कहा कि यह अनुचित माना गया कि अगर दिन के अंतिम ओवर में गेंदबाजी कर रही टीम विकेट ले ले, तो बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि इससे समय की बचत भी नहीं होती, क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी ही पड़ती हैं। साथ ही इससे खेल का रोमांच कम हो जाता है। नया बल्लेबाज मुश्किल परिस्थितियों से बच जाता है क्योकि आमतौर पर उस समय गेंदबाजों के लिए हालात अनुकूल होते हैं।
नए नियम इस साल अक्तूबर से लागू होंगे। एमसीसी ने कहा कि 2022 के बाद पहली बार जारी की गई लॉज ऑफ क्रिकेट की नई प्रति का मकसद नियमों को समय के अनुरूप और आधुनिक खेल के लिए अधिक समावेशी बनाना है। एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि बहु-दिवसीय मैचों में दिन का अंतिम ओवर अब हर हाल में पूरा कराया जाएगा। एमसीसी के अनुसार, ऐसा न होने से “खेल का रोमांच कम हो जाता है। एमसीसी ने कहा कि यह अनुचित माना गया कि अगर दिन के अंतिम ओवर में गेंदबाजी कर रही टीम विकेट ले ले, तो बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि इससे समय की बचत भी नहीं होती, क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन पूरी करनी ही पड़ती हैं। साथ ही इससे खेल का रोमांच कम हो जाता है। नया बल्लेबाज मुश्किल परिस्थितियों से बच जाता है क्योकि आमतौर पर उस समय गेंदबाजों के लिए हालात अनुकूल होते हैं।
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क्या-क्या हुए बदलाव?
- एमसीसी ने मौजूदा और पूर्व महिला खिलाड़ियों के साथ मिलकर जूनियर और महिला क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली गेंदों के लिए नए मानक और नाम भी तय किए हैं।
- एमसीसी के अनुसार अब गेंदों को साइज-1, साइज-2 और साइज-3 के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- साइज-1 (पारंपरिक पुरुषों की गेंद) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अब तीनों श्रेणियों के लिए मानक एक समान कर दिए गए हैं।
- एमसीसी ने लागत कम करने के उद्देश्य से ओपन एज क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल को भी मंजूरी दे दी है। इससे पहले ऐसे बल्लों की अनुमति केवल जूनियर क्रिकेट में थी।
- विकेटकीपर से जुड़े नियम में भी बदलाव किया गया है। अब गेंद फेंके जाने से पहले अगर विकेटकीपर स्टंप्स के बराबर या आगे खड़ा होता है, तो इसे नोबॉल नहीं माना जाएगा।
- सीमा रेखा के पास लिए जाने वाले कैच को लेकर ‘बनी हॉप कैच’ को हटाया गया है।
- अब कोई भी क्षेत्ररक्षक सीमा के बाहर रहते हुए हवा में गेंद को केवल एक बार छू सकता है और उसके बाद पूरी तरह बाउंड्री के अंदर जमीन पर होना जरूरी होगा।
ओवरथ्रो का नियम किया स्पष्ट
एमसीसी ने पहली बार ओवरथ्रो की स्पष्ट परिभाषा भी दी है। इसके अनुसार, रन रोकने या रनआउट के प्रयास में स्टंप्स की ओर फेंकी गई गेंद को ओवरथ्रो माना जाएगा, जबकि केवल गेंद रोकने या दूसरे क्षेत्ररक्षकों को देने में हुई चूक को ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा। जानबूझकर शॉर्ट रन लेने की स्थिति में अब क्षेत्ररक्षक टीम को यह तय करने का अधिकार होगा कि अगली गेंद पर कौन सा बल्लेबाज स्ट्राइक पर रहेगा।
एमसीसी ने पहली बार ओवरथ्रो की स्पष्ट परिभाषा भी दी है। इसके अनुसार, रन रोकने या रनआउट के प्रयास में स्टंप्स की ओर फेंकी गई गेंद को ओवरथ्रो माना जाएगा, जबकि केवल गेंद रोकने या दूसरे क्षेत्ररक्षकों को देने में हुई चूक को ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा। जानबूझकर शॉर्ट रन लेने की स्थिति में अब क्षेत्ररक्षक टीम को यह तय करने का अधिकार होगा कि अगली गेंद पर कौन सा बल्लेबाज स्ट्राइक पर रहेगा।
