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Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   When Years of Grit and Grace Collided: Legends Sachin, Mithali, Jhulan, and Rohit Witness Daughters History

जब बेटियों का बरसों का संघर्ष बड़ी खूबसूरती से टकराया और इसके साक्षी बने सचिन, मिताली, झूलन और रोहित!

Mon, 03 Nov 2025 02:55 PM IST
Vibhas Sane विभास साने
Updated Mon, 03 Nov 2025 02:55 PM IST
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When Years of Grit and Grace Collided: Legends Sachin, Mithali, Jhulan, and Rohit Witness Daughters History
भारत की बेटियां बनीं विश्व चैंपियन - फोटो : PTI
यह क्षण भारत का है। ...नहीं। फिर से पढ़ते हैं। 
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...यह क्षण असल में भारत की बेटियों का है। 


अंग्रेज़ी में एक कहावत है- डेस्टिनी इज़ ए स्टबर्न थिंग। ...नियति बड़ी जिद्दी चीज होती है। इसे बदलने के लिए भी जिद चाहिए होती है। रविवार को नवी मुंबई में जब भारतीय महिला क्रिकेट ने विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया, तो अपनी जिद से नियति को बदल दिया। जो देश लंबे वक्त तक महिलाओं-बेटियों को सहानुभूति का विषय मानता रहा, उन्हीं बेटियों ने गर्व की कभी न भूली जाने वाली अनुभूति का मौका दे दिया। जैसे बरसों का संघर्ष खूबसूरती से विजय के क्षणों से टकराया। जैसे बेटियों ने एवरेस्ट ही उठा लिया। 

सेमीफाइनल में जगह बनाना। फिर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ बड़ा लक्ष्य हासिल कर फाइनल तक आना। क्या जेमिमा रॉड्रिग्स, क्या शेफाली वर्मा, क्या हरमन और क्या दीप्ति... सब ने जैसे मैदान पर अपना भाग्य बदल दिया। अपनी नियति की रोमांचक पटकथा खुद अपने हाथ से लिख दी।

इससे पहले खेलों में हमने कई नाम सुने थे। जैसे क्रिकेटर डायना एडुल्जी। 49 साल पहले डेब्यू। फिर आया अस्सी का दशक। यानी पीटी उषा का दशक। बेटियां जब शैतानी करते हुए मोहल्लों में तेज दौड़ती थीं, तो मांएं कहती थीं- पीटी उषा बनी फिरती है...। पीटी उषा की दौड़ उपमा बन गई थी।
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पीटी उषा के दौर में ही पुरुष क्रिकेट टीम कपिल देव की कप्तानी में वनडे विश्वकप जीत चुकी थी। सुनील गावस्कर जैसे खिलाड़ी थे। सचिन तेंदुलकर नाम के सितारे का उदय हो चुका था। उधर, अन्य खेलों में नारी शक्ति के हमने कई स्वरूप देखे। सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल, पीटी उषा, कर्णम मल्लेश्वरी, पीवी सिंधु, साक्षी मलिक, फोगाट बहनें, दीपा कर्माकर, मीराबाई चानू और मनु भाकर जैसे नामों ने हमेशा के लिए अपनी छाप छोड़ी।

इस बीच शताब्दी बदली। भारतीय क्रिकेट ने आईपीएल के दौर में प्रवेश किया, लेकिन महिला क्रिकेट में विश्व कप के ताज का इंतजार अभी बाकी था। बीस-बीस साल इस खेल को मिताली राज और झूलन गोस्वामी जैसी हस्तियों ने दिए। 2005 और 2017 के दो मौके भी आए, लेकिन ख्वाब मुकम्मल होते-होते रह गया। बेटियां लड़ीं, लेकिन कामयाबी एक कदम दूर रह गई। हम दोनों मौकों पर फाइनल हार गए। आखिरकार, 2 नवंबर 2025 को बेटियों ने विश्व कप जीत लिया। फिर मैदान पर जो दृश्य दिखे, वह बरसों तक याद रखे जाएंगे।
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जब रोहित ने आसमान की तरफ देखा...
कुछ किरदार हमेशा याद रखे जाएंगे। इनमें एक नाम है हिटमैन रोहित शर्मा। रविवार को वे फाइनल देखने पूरे परिवार के साथ स्टेडियम में मौजूद थे। जब मैदान पर हरमन ने आखिरी कैच लपककर जीत की स्प्रिंट लगाई, तो जश्न के पहले दृश्यों में रोहित शर्मा नजर आए। 

चैंपियंस ट्रॉफी जीतने या दोहरा शतक लगाने की खुशी से भी ज्यादा खुशी रोहित के चेहरे पर थी। रोहित ने आसमान की तरफ देखा। जैसे यह कह रहे हों कि आज का दिन याद रखना! ...उनकी आंखें नम थीं। उन्हें 2023 का पुरुष विश्व कप जरूर याद आया होगा, जब सारे मैच जीतकर फाइनल में टीम हार गई थी। उस विश्व कप से पहले रोहित ने कहा था- मुझे बस वर्ल्ड कप दिखता है भाई...। 

दूसरा नाम है मिताली राज, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला खिलाड़ी हैं। तीसरा नाम है झूलन गोस्वामी, जो चकदा एक्सप्रेस कहलाईं। आखिरी नाम है सचिन तेंदुलकर, जिनके कई रिकॉर्ड कभी नहीं टूटेंगे। 

जब महिला क्रिकेटरों ने इतिहास रच दिया, तो मिताली राज भावुक हो गईं। कमेंट्री रोककर पीछे चल रहे जश्न को देखती रहीं। युवा खिलाड़ियों की उन पर नजर पड़ी। सम्मान अपने आप दिखाई देने लगा। बारी-बारी से ट्रॉफी मिताली और झूलन के हाथों में थमा दी गई। जिस मिताली ने 2017 के फाइनल में हार के बाद भी आंसू रोक रखे थे, वे इस बार भावुक हो गईं। ट्रॉफी को हवा में उछाल दिया। 

सचिन तेंदुलकर तो भारतीय क्रिकेट के 'गार्जियन' की तरह टॉस के पहले से मैदान पर मौजूद थे। शेफाली वर्मा ने खुलासा किया कि सचिन खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते रहते हैं और फाइनल में सचिन को देखकर वे जज्बे से भर गईं।

इस जीत के पीछे कई किरदार हैं। कोच अमोल मजूमदार, जिनके पैर छूतीं हरमन की भावुक तस्वीर हमने देखी। इनके अलावा चयनकर्ता, सपोर्ट स्टाफ आदि ने इस टीम को बनाया। बहरहाल, असली चैम्पियन तो बेटियां ही हैं, जिन्होंने बीते 50 बरस में कई हाथों से गुजरती मशाल को अपने आखिरी पड़ाव तक पहुंचाया।

उम्मीद है कि इस जीत को हम महिला क्रिकेट के कपिल देव मोमेंट के तौर पर याद नहीं रखेंगे, क्योंकि तुलनाओं से परे यह महिला क्रिकेट का 'महिला क्रिकेट मोमेंट' ही है।

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