वैभव सूर्यवंशी: बड़े मंच का बड़ा खिलाड़ी! दबाव बढ़ते ही और खतरनाक हो जाते हैं 'बेबी बॉस'; जमकर गरजता है बल्ला
वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बड़े मंच और दबाव वाले मुकाबले उनके खेल को और निखार देते हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला के फाइनल में 29 गेंदों पर 94 रन की विस्फोटक पारी खेलकर 15 वर्षीय बल्लेबाज ने आलोचकों को जवाब दिया। अंडर-19 विश्व कप फाइनल, आईपीएल 2026 और अब इस फाइनल में उनके प्रदर्शन बताते हैं कि वैभव उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो रहे हैं जो बड़े मौकों पर अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
क्रिकेट में प्रतिभाएं आती-जाती रहती हैं, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो बहुत कम उम्र में ही यह संकेत दे देते हैं कि वे साधारण नहीं हैं। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी भी अब उसी श्रेणी में आते दिखाई दे रहे हैं। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने बार-बार साबित किया है कि बड़े मुकाबलों का दबाव उन्हें डराता नहीं, बल्कि और अधिक खतरनाक बना देता है।
वैभव ने फाइनल में दिखाया दम
हाल ही में श्रीलंका ए के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के दौरान वैभव पहली बार अपने खेल से ज्यादा खराब प्रदर्शन और एक विवाद की वजह से चर्चा में आए। फाइनल से पहले तक उनका बल्ला नहीं बोला था। वह 30-40 के स्कोर पर आउट हो रहे थे। इसके बाद मैदान पर श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ हुई कहासुनी ने उनकी मानसिकता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। कुछ लोगों ने इसे उनकी अपरिपक्वता बताया तो कुछ ने अंदाजा लगाया कि इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ सकता है, लेकिन वैभव ने जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से दिया।
फाइनल में बल्ले से दिया जवाब
- त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। पहले ही ओवर में मोहम्मद शिराज की गेंद पर शानदार चौका लगाकर उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए। इसके बाद जो हुआ, वह किसी तूफान से कम नहीं था।
- वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोक डाले। इस दौरान उन्होंने गेंदबाजों की जमकर धुनाई की और मैदान के हर कोने में शॉट लगाए। उनकी स्ट्राइक रेट 324.14 रही, जो किसी भी स्तर के क्रिकेट में असाधारण मानी जाती है।
- सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने महज 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया। यह ऐसी पारी थी जिसने मैच का रुख बदल दिया और फाइनल को लगभग एकतरफा बना दिया। वैभव जब बल्लेबाजी कर रहे थे, तब एक वक्त तो भारत का प्रोजेक्टेड स्कोर 950 तक पहुंच गया था।
बड़े मैचों में अलग ही रूप दिखाते हैं वैभव
- इस पारी को सिर्फ एक विस्फोटक पारी कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि वैभव के पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है, जब मुकाबला बड़ा होता है, तब उनका बल्ला और ज्यादा खतरनाक हो जाता है।
- अंडर-19 विश्व कप में उनका अभियान बहुत शानदार नहीं रहा था, लेकिन फाइनल में उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर भारत को खिताब दिलाया। यह प्रदर्शन बताता है कि दबाव की घड़ी में उनका आत्मविश्वास कम नहीं होता, बल्कि बढ़ जाता है।
आईपीएल में भी छोड़ी अमिट छाप
- इसके बाद आईपीएल 2026 आया और वैभव ने दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का एक और नमूना पेश किया। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर में उन्होंने सिर्फ 29 गेंदों पर 97 रन बनाकर राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाई।
- फिर क्वालिफायर-2 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ 47 गेंदों पर 96 रन बनाए। हालांकि राजस्थान वह मुकाबला हार गई, लेकिन वैभव की पारी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही। इन दोनों पारियों ने दिखा दिया कि वह सिर्फ युवा प्रतिभा नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने वाले खिलाड़ी हैं।
'प्रेशर इज अ प्रिविलेज' को जी रहे हैं वैभव
आईपीएल 2026 के दौरान विराट कोहली ने कहा था, 'प्रेशर इज अ प्रिविलेज' यानी दबाव एक विशेषाधिकार है। इसका मतलब यह है कि दबाव उन्हीं खिलाड़ियों पर होता है जिनसे लोगों को उम्मीदें होती हैं। 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी पर भी करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की नजरें हैं। हर बार जब वह बल्लेबाजी करने उतरते हैं तो उनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जाती है। इतनी कम उम्र में यह अपेक्षाएं किसी भी खिलाड़ी पर भारी पड़ सकती हैं, लेकिन वैभव अब तक इन उम्मीदों के बोझ तले दबे नहीं हैं। बल्कि उनके प्रदर्शन बताते हैं कि वह इस दबाव का आनंद लेते हैं और बड़े मंच पर खुद को साबित करने का अवसर मानते हैं।
भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा?
- वैभव सूर्यवंशी अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियां ही चढ़ रहे हैं। उन्हें तकनीक, स्वभाव और निरंतरता के मामले में अभी बहुत कुछ सीखना है। लेकिन एक गुण जो उनमें अभी से दिखाई देता है, वह है बड़े मौकों पर निडर होकर खेलने की क्षमता।
- शायद यही वजह है कि क्रिकेट विशेषज्ञ उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मानने लगे हैं। अगर उनका यह रवैया और प्रदर्शन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा खिलाड़ी मिल सकता है, जो दबाव में टूटता नहीं, बल्कि और चमकता है।