{"_id":"69c2a60a12f8ad5a000d94c9","slug":"ai-will-give-a-new-direction-to-disaster-management-suman-dehradun-news-c-5-hld1006-929408-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"एआई से आपदा प्रबंधन को \nमिलेगी नई दिशा : सुमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एआई से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा : सुमन
विज्ञापन
विज्ञापन
यूएसडीएमए में एआई पर हुई कार्यशाला
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) पर कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ ही कार्मिकों को एआई के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक के तेज बदलाव का दौर है। एआई इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। इसे हमें सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए पर पूरी तरह उस पर निर्भर नहीं होना है। एआई से आपदाओं की पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत किया जा सकता है। जैसे मौसम आधारित अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ की संभावनाओं का पूर्व आकलन। एआई से रियल टाइम डाटा एनालिसिस के जरिए त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। एआई आधारित सिस्टम से जोखिम मानचित्रण (रिस्क मैपिंग), संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है। सैटेलाइट इमेज और ड्रोन डाटा के विश्लेषण से प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से आकलन किया जा सकता है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा सके।
--
एआई उपयोग में जिम्मेदारी आवश्यक : पांडेय
आईटीडीए के निदेशक आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि एआई के उपयोग में जिम्मेदारी और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से डाटा के सत्यापन पर जोर देते हुए कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी सूचना का उपयोग या प्रसार नहीं किया जाना चाहिए। एआई का सही दिशा में उपयोग कर आपदा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ ही मानवीय निर्णय क्षमता, अनुभव और संवेदनशीलता को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
-- -
यह जानकारी दी गई
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एआई की मूल अवधारणा, उसके कार्य करने के तरीके तथा विभिन्न प्लेटफॉर्म जैसे चैट जीपीटी, क्लॉड और जैमिनी के बारे में जानकारी दी गई। एआई आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम से आम जनता तक समय पर सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इससे अफवाहों पर नियंत्रण पाने और जन-जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिलती है। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चौहान आदि मौजूद थे।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) पर कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ ही कार्मिकों को एआई के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक के तेज बदलाव का दौर है। एआई इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। इसे हमें सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए पर पूरी तरह उस पर निर्भर नहीं होना है। एआई से आपदाओं की पूर्वानुमान क्षमता को मजबूत किया जा सकता है। जैसे मौसम आधारित अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ की संभावनाओं का पूर्व आकलन। एआई से रियल टाइम डाटा एनालिसिस के जरिए त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। एआई आधारित सिस्टम से जोखिम मानचित्रण (रिस्क मैपिंग), संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है। सैटेलाइट इमेज और ड्रोन डाटा के विश्लेषण से प्रभावित क्षेत्रों का तेजी से आकलन किया जा सकता है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
एआई उपयोग में जिम्मेदारी आवश्यक : पांडेय
आईटीडीए के निदेशक आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि एआई के उपयोग में जिम्मेदारी और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से डाटा के सत्यापन पर जोर देते हुए कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी सूचना का उपयोग या प्रसार नहीं किया जाना चाहिए। एआई का सही दिशा में उपयोग कर आपदा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ ही मानवीय निर्णय क्षमता, अनुभव और संवेदनशीलता को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
यह जानकारी दी गई
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को एआई की मूल अवधारणा, उसके कार्य करने के तरीके तथा विभिन्न प्लेटफॉर्म जैसे चैट जीपीटी, क्लॉड और जैमिनी के बारे में जानकारी दी गई। एआई आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम से आम जनता तक समय पर सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इससे अफवाहों पर नियंत्रण पाने और जन-जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिलती है। इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चौहान आदि मौजूद थे।