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भरसार विश्वविद्यालय: एक अधिकारी, दस दिन, दो पत्रों में विरोधाभास; सहायक कुलसचिव पर उठे सवाल

Mon, 07 Sep 2026 07:49 PM IST
Alka Tyagi राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 07 Sep 2026 07:49 PM IST
सार

शिकायत में धीरज उपाध्याय की मानसिक स्थिति अत्यधिक खराब होने तथा देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में उपचार चलने का उल्लेख करते हुए उनकी चुनाव ड्यूटी निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। इसके ठीक दस दिन बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही शासन को पत्र भेजकर धीरज उपाध्याय को विश्वविद्यालय में ही पूर्ण रूप से सेवायोजित करने की मांग की।

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Bharsar University One official  ten days contradictions in two letters questions raised on Registrar
पत्र - फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)

विस्तार

महज दस दिन... और एक ही अधिकारी के आकलन में जमीन-आसमान का अंतर। एक पत्र में उनकी मानसिक स्थिति अत्यधिक खराब बताते हुए चुनाव ड्यूटी निरस्त कराने की सिफारिश की गई। फिर ठीक दस दिन बाद शासन को भेजे पत्र में उन्हें प्रशासनिक, वित्तीय और अकादमिक कार्यों में कुशल, नियमों और बजट की अच्छी जानकारी रखने वाला अधिकारी बताते हुए विश्वविद्यालय में ही पूर्ण रूप से सेवायोजित करने की पैरवी की गई।

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मामला वीरचंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार में सहायक कुलसचिव के पद पर प्रतिनियुक्ति पर तैनात धीरज उपाध्याय से जुड़ा है। उनकी मूल तैनाती उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर बताई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार भरसार विश्वविद्यालय में उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि 17 अप्रैल 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद उन्हें मूल विभाग में वापस नहीं भेजा गया। इस संबंध में अगस्त 2025 में शासन को शिकायत भेजी गई।
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शिकायत में कहा गया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान 11 जुलाई 2025 को विश्वविद्यालय की ओर से निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजा गया। इसमें धीरज उपाध्याय की मानसिक स्थिति अत्यधिक खराब होने तथा देहरादून के इंद्रेश अस्पताल में उपचार चलने का उल्लेख करते हुए उनकी चुनाव ड्यूटी निरस्त करने का अनुरोध किया गया था। इसके ठीक दस दिन बाद 21 जुलाई 2025 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही शासन को पत्र भेजकर धीरज उपाध्याय को विश्वविद्यालय में ही पूर्ण रूप से सेवायोजित करने की मांग की। इस पत्र में उनके प्रशासनिक, वित्तीय और अकादमिक कार्यों के कुशल संचालन का उल्लेख किया गया। शिकायतकर्ता ने दोनों पत्रों को आधार बनाते हुए अधिकारी की मानसिक स्थिति खराब होने पर भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर तैनाती पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।

- धीरज उपाध्याय की प्रतिनियुक्ति अवधि पूर्ण हो चुकी हैं। उन्हें मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजने के लिए कई बार भरसार विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजा गया है। लेकिन अभी तक उन्हें वापस नहीं भेजा गया है। -डॉ. एसके बरनवाल, कुलसचिव, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि ।

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