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Dehradun News: शिक्षा निदेशालय के निर्देश से प्रदेश के निजी स्कूलों में असमंजस
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- जीओ को ताक पर रखकर आधे अधूरे निर्देश से कई बच्चों का साल हो रहा खराब
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के निजी स्कूलों में बच्चों के कक्षा एक में दाखिले को लेकर शिक्षा निदेशालय के अस्पष्ट और आधे अधूरे निर्देश से निजी स्कूल प्रबंधन असमंजस में हैं। वहीं, इससे इन स्कूलों में पहले से पढ़ने वाले कई बच्चों का साल खराब हो रहा है। हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर सहित कई जिलों में यह स्थिति बनी है।
शैक्षिक सत्र 2026-27 में बच्चों के दाखिले और पाठ्य पुस्तकों के संबंध में शिक्षा निदेशालय के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि निजी स्कूल प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं की आयु का ध्यान विशेष रूप से रखें। शैक्षिक सत्र की प्रारंभ की तिथि एक अप्रैल को छह साल की उम्र पूरी कर चुके छात्र-छात्राओं को कक्षा एक में प्रवेश दिया जाए। वहीं, छात्र-छात्राओं के साथ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, लेकिन इस आदेश में शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के पिछले साल 13 जून 2025 के उस आदेश का जिक्र नहीं किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में जिन बच्चों ने प्री स्कूल, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी में प्रवेश ले लिया है। उन्हें कक्षा एक में अध्ययन की अनुमति पूर्व के वर्षों की तरह प्रदान की जाएगी। उनके आगे की पढ़ाई की निरंतरता में कोई व्यवधान नहीं होगा। जिलों में डीईओ की ओर से सभी सरकारी, अशासकीय और निजी स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य को जारी निर्देश में इसका जिक्र न होने से निजी स्कूलों में पहले से प्री स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के कक्षा एक में पहुंचने पर उन्हें कक्षा रिपीट करने या फिर किसी अन्य स्कूल में दाखिला लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिससे अभिभावक परेशान हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा निदेशालय और जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के आदेश को ताक पर रखे हुए हैं। जिससे विभिन्न जिलों में सैकड़ों बच्चों का साल खराब हो रहा है। गायत्री विद्यापीठ हरिद्वार के प्रधानाचार्य सीताराम सिन्हा बताते हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी ने जो निर्देश जारी किया है उसके अनुरूप छह साल के बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश दिया जा रहा है। इस आदेश में स्कूल में पहले से नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी में पढ़ रहे बच्चों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है।
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कक्षा एक में प्रवेश के समय बच्चे की उम्र छह साल होनी चाहिए, पिछले तीन साल से इसमें छूट दी जा रही है, लेकिन पहले से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लेकर इसमें छूट का पिछले साल का शासनादेश है, तो स्कूलों को शासनादेश पर अमल करना चाहिए। - अमित कुमार चंद, जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के निजी स्कूलों में बच्चों के कक्षा एक में दाखिले को लेकर शिक्षा निदेशालय के अस्पष्ट और आधे अधूरे निर्देश से निजी स्कूल प्रबंधन असमंजस में हैं। वहीं, इससे इन स्कूलों में पहले से पढ़ने वाले कई बच्चों का साल खराब हो रहा है। हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर सहित कई जिलों में यह स्थिति बनी है।
शैक्षिक सत्र 2026-27 में बच्चों के दाखिले और पाठ्य पुस्तकों के संबंध में शिक्षा निदेशालय के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि निजी स्कूल प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं की आयु का ध्यान विशेष रूप से रखें। शैक्षिक सत्र की प्रारंभ की तिथि एक अप्रैल को छह साल की उम्र पूरी कर चुके छात्र-छात्राओं को कक्षा एक में प्रवेश दिया जाए। वहीं, छात्र-छात्राओं के साथ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए, लेकिन इस आदेश में शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के पिछले साल 13 जून 2025 के उस आदेश का जिक्र नहीं किया गया है, जिसमें कहा गया है कि वर्तमान में जिन बच्चों ने प्री स्कूल, नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी में प्रवेश ले लिया है। उन्हें कक्षा एक में अध्ययन की अनुमति पूर्व के वर्षों की तरह प्रदान की जाएगी। उनके आगे की पढ़ाई की निरंतरता में कोई व्यवधान नहीं होगा। जिलों में डीईओ की ओर से सभी सरकारी, अशासकीय और निजी स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य को जारी निर्देश में इसका जिक्र न होने से निजी स्कूलों में पहले से प्री स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के कक्षा एक में पहुंचने पर उन्हें कक्षा रिपीट करने या फिर किसी अन्य स्कूल में दाखिला लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जिससे अभिभावक परेशान हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा निदेशालय और जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के आदेश को ताक पर रखे हुए हैं। जिससे विभिन्न जिलों में सैकड़ों बच्चों का साल खराब हो रहा है। गायत्री विद्यापीठ हरिद्वार के प्रधानाचार्य सीताराम सिन्हा बताते हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी ने जो निर्देश जारी किया है उसके अनुरूप छह साल के बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश दिया जा रहा है। इस आदेश में स्कूल में पहले से नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी में पढ़ रहे बच्चों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है।
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कक्षा एक में प्रवेश के समय बच्चे की उम्र छह साल होनी चाहिए, पिछले तीन साल से इसमें छूट दी जा रही है, लेकिन पहले से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को लेकर इसमें छूट का पिछले साल का शासनादेश है, तो स्कूलों को शासनादेश पर अमल करना चाहिए। - अमित कुमार चंद, जिला शिक्षा अधिकारी हरिद्वार