Uttarakhand: बच्चे की देखभाल में खुद का स्वास्थ्य भूल रही महिलाएं, बढ़ी फिशर की समस्या, ये सावधानी जरूरी
बच्चे की देखभाल में महिलाएं खुद का स्वास्थ्य भूल रही है। इससे समस्या फिशर की समस्या बढ़ रही है।
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प्रसव के बाद बच्चे की देखभाल में जुटी महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। इसका असर फिशर जैसी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। खानपान में अनियमितता, तनाव और पर्याप्त पानी न पीने के कारण महिलाओं में यह परेशानी बढ़ रही है। राजकीय उपजिला चिकित्सालय की ओपीडी में फिशर की शिकायत लेकर रोजाना पांच से सात महिलाएं पहुंच रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर उपचार और दिनचर्या में सुधार जरूरी है।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तैनात वरिष्ठ सर्जन डॉ. आकांक्षा ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में फिशर की शिकायत लेकर आने वाली महिलाओं की संख्या लगातार देखने को मिल रही है। डॉ. आकांक्षा के अनुसार, प्रसव के बाद कई महिलाएं अक्सर बच्चे की देखभाल में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं देती हैं।
दिनचर्या में बदलाव, नींद पूरी न होना, खानपान में बदलाव, तनाव, पानी का सेवन कम करना फिशर और बवासीर की समस्या को बढ़ा सकता है। ऐसे में प्रसव के बाद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर रहने की जरूरत है। महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को सामाजिक संकोच के कारण छिपाने या टालने की प्रवृत्ति भी देखी जाती है। फिशर की समस्या में भी कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेतीं। चिकित्सकों का कहना है कि दर्द या लगातार बनी रहने वाली परेशानी को सामान्य मानकर टालने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराना चाहिए।
महिलाओं में फिशर के कारण
डॉ. आकांक्षा बताती हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के दौरान पेल्विक क्षेत्र और गुदा पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे फिशर का खतरा बढ़ जाता है। फाइबर की कमी और पानी कम पीने से मल सख्त हो जाता है, जिससे गुदा की त्वचा में कट लग जाते हैं। लगातार दस्त होने से भी गुदा क्षेत्र में जलन और त्वचा को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा तनाव, मोटापा और आंतों की बीमारी (जैसे- क्रोहन रोग) भी फिशर का कारण बन सकते हैं।
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प्रमुख लक्षण
मल त्याग के दौरान तेज, चुभने वाला दर्द
मल त्याग के बाद भी घंटों तक जलन और दर्द का बने रहना।
गुदा के आसपास की त्वचा में सूजन या छोटा सा मस्सा बनना।
- बार बार दस्त और कब्ज भी फिशर के प्रमुख कारण हैं।
खानपान और तनाव पर दें ध्यान
डॉ. आकांक्षा बधानी बताती हैं कि फिशर जैसी समस्या से बचाव के लिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है। कहा कि पर्याप्त पानी पीने, संतुलित आहार लेने और कब्ज जैसी परेशानी को नजरअंदाज न किया जाए। लंबे समय तक दर्द या अन्य परेशानी बनी रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।