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Dehradun News: किताब कौतिक में हिंदी साहित्य के संकट से हिमालयी विकास पर मंथन
Mon, 26 Oct 2026 02:25 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Mon, 26 Oct 2026 02:25 AM IST
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देहरादून। किताबों से दोस्ती कराने और युवाओं में पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित 16वें किताब कौतिक का रविवार को समापन हो गया। क्रिएटिव उत्तराखंड की ओर से दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में आयोजित पुस्तक मेले की थीम आओ, दोस्ती करें किताबों से रही। तीन दिनों तक चले आयोजन में साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण, हिमालयी विकास और युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। देशभर के प्रकाशकों की हजारों पुस्तकें भी पाठकों के लिए उपलब्ध रहीं। मेले के तीसरे दिन की शुरुआत नेचर वॉक के साथ हुई।
इसके बाद हिंदी साहित्य की दुनिया विषय पर आयोजित सत्र में साहित्यकार जितेन ठाकुर, कुसुम भट्ट और महाबीर रवांल्टा ने विचार रखे। सत्र का संचालन प्रेम पंचोली ने किया। कुसुम भट्ट ने कहा कि साहित्य में रस होता है और यह दुनिया को बेहतर बनाने का काम करता है। साहित्यकार संवेदनशील होता है और यथार्थ के साथ अमूर्त भावों को भी मूर्त रूप देता है। महाबीर रवांल्टा ने कहा कि लेखन पुरस्कार पाने के लिए नहीं बल्कि पढ़ने और पढ़ाने के उद्देश्य से होना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया को संवाद का सशक्त माध्यम भी बताया। वरिष्ठ साहित्यकार जितेन ठाकुर ने हिंदी साहित्य के सामने मौजूद चुनौतियों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं का बंद होना हिंदी साहित्य के लिए चिंता का विषय है। हिमालयी विकास की दिशा विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में उत्तराखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव नृप सिंह नपल्च्याल और पद्मश्री डॉ. कल्याण सिंह रावत ने विचार रखे। सत्र का संचालन अनूप नौटियाल ने किया। नृप सिंह नपल्च्याल ने कहा कि उत्तराखंड में भूटान के मॉडल की तर्ज पर सतत विकास की दिशा में काम करने की जरूरत है। वहीं, डॉ. कल्याण सिंह रावत ने पर्यटन और तीर्थाटन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। केवल भीड़ बढ़ाना पर्यटन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
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पुस्तक चर्चा सत्र में श्रुति वत्स की कृति कुल जमा पर चर्चा हुई। इसमें मनोज पांडेय ने वार्ताकार की भूमिका निभाई। इसके बाद कुछ बातें युवाओं से सत्र में युवाओं की समस्याओं, भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे विषयों पर संवाद हुआ। सत्र में आईपीएस तृप्ति भट्ट, शिव प्रसाद सेमवाल, सुशील उपाध्याय और ललित जोशी शामिल हुए जबकि संचालन दीप्ति भट्ट ने किया। तृप्ति भट्ट ने युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को केवल पाठ्यक्रम और समय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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इसके बाद हिंदी साहित्य की दुनिया विषय पर आयोजित सत्र में साहित्यकार जितेन ठाकुर, कुसुम भट्ट और महाबीर रवांल्टा ने विचार रखे। सत्र का संचालन प्रेम पंचोली ने किया। कुसुम भट्ट ने कहा कि साहित्य में रस होता है और यह दुनिया को बेहतर बनाने का काम करता है। साहित्यकार संवेदनशील होता है और यथार्थ के साथ अमूर्त भावों को भी मूर्त रूप देता है। महाबीर रवांल्टा ने कहा कि लेखन पुरस्कार पाने के लिए नहीं बल्कि पढ़ने और पढ़ाने के उद्देश्य से होना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया को संवाद का सशक्त माध्यम भी बताया। वरिष्ठ साहित्यकार जितेन ठाकुर ने हिंदी साहित्य के सामने मौजूद चुनौतियों पर चिंता जताई।
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उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं का बंद होना हिंदी साहित्य के लिए चिंता का विषय है। हिमालयी विकास की दिशा विषय पर आयोजित दूसरे सत्र में उत्तराखंड के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव नृप सिंह नपल्च्याल और पद्मश्री डॉ. कल्याण सिंह रावत ने विचार रखे। सत्र का संचालन अनूप नौटियाल ने किया। नृप सिंह नपल्च्याल ने कहा कि उत्तराखंड में भूटान के मॉडल की तर्ज पर सतत विकास की दिशा में काम करने की जरूरत है। वहीं, डॉ. कल्याण सिंह रावत ने पर्यटन और तीर्थाटन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। केवल भीड़ बढ़ाना पर्यटन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
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पुस्तक चर्चा सत्र में श्रुति वत्स की कृति कुल जमा पर चर्चा हुई। इसमें मनोज पांडेय ने वार्ताकार की भूमिका निभाई। इसके बाद कुछ बातें युवाओं से सत्र में युवाओं की समस्याओं, भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे विषयों पर संवाद हुआ। सत्र में आईपीएस तृप्ति भट्ट, शिव प्रसाद सेमवाल, सुशील उपाध्याय और ललित जोशी शामिल हुए जबकि संचालन दीप्ति भट्ट ने किया। तृप्ति भट्ट ने युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को केवल पाठ्यक्रम और समय पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।