देहरादून: गिरिधारी ने पत्नी के मंत्री होने का हवाला देकर जताया गिरफ्तारी का डर, कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज
गिरिधारी लाल साहू के खिलाफ कैंट थाने में उनकी पत्नी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज है। इसमें आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रताड़ना और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में आरोप लगाए गए हैं।
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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरिधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरिधारी को अदालत ने अग्रिम जमानत नहीं दी है। आरोपी ने अपनी याचिका में आशंका जताई थी कि पत्नी के राजनीतिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे गिरफ्तार कराया जा सकता है।
विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दी। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) अंजली बेंजवाल की अदालत ने शनिवार को यह आदेश दिया।
गिरिधारी लाल साहू के खिलाफ कैंट थाने में उनकी पत्नी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज है। इसमें आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रताड़ना और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में आरोप लगाए गए हैं।
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बंद कमरे में घटना होने की दी दलील
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि दोनों की शादी को 22 साल हो चुके हैं और विवाद घरेलू व आर्थिक प्रकृति का है। अधिवक्ताओं ने कहा कि कथित जातिसूचक टिप्पणी निजी बंद कमरे में की गई थी, जहां आम जनता की मौजूदगी नहीं थी। राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद सिंह ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि मंत्री के सरकारी आवास पर स्टाफ के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।
अदालत ने माना कि निजी परिसर में भी अन्य लोगों की मौजूदगी में अपमान होने पर वह स्थान पब्लिक व्यू के दायरे में आ सकता है। कर्मचारियों की मौजूदगी और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच साक्ष्यों के आधार पर होगी। अदालत ने एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत अग्रिम जमानत पर कानूनी प्रतिबंध को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।