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Dehradun News: नियम विरुद्ध फीस बढ़ाई तो स्कूल की खैर नहीं
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प्रदेशभर के विद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र-2026-27 की शुरुआत हो गई है। ऐसे में नियम विरुद्ध फीस बढ़ोतरी करने वाले विद्यालयों पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सख्त नजर है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि नियम विरुद्ध फीस बढ़ोतरी करने वाले विद्यालय प्रबंधन की खैर नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र नई ऊर्जा, नए संकल्प और नए सपनों के साथ आगे बढ़ने का है। बच्चों और अभिभावकों में जो उत्साह इस समय देखने को मिलता है वही हमारे भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. खन्ना ने कहा कि फीस बढ़ोतरी पर कोई भी शिकायत मिलने पर आयोग की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। कहा कि जब हम अपने बच्चों के लिए विद्यालय का चयन करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि शिक्षा केवल अंकों और पुस्तकों तक सीमित नहीं है। एक विद्यालय का वास्तविक उद्देश्य बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना होना चाहिए।
हमें ऐसे विद्यालयों का चयन करना चाहिए जो बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाएं। वहीं, हाल के दिनों में हुई स्कूल बस दुर्घटनाएं और बच्चों के आक्रामक व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहा कि ये घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने बच्चों को सही दिशा दे पा रहे हैं। स्पष्ट है कि अब समय आ गया है कि हम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को जीवन कौशल, भावनात्मक संतुलन और नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दें। अभिभावकों बच्चों के साथ प्रेम और संवाद बनाए रखें। उन्हें समय दें, उनकी बात सुनें और उनके मित्र बनें।
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उन्होंने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र नई ऊर्जा, नए संकल्प और नए सपनों के साथ आगे बढ़ने का है। बच्चों और अभिभावकों में जो उत्साह इस समय देखने को मिलता है वही हमारे भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. खन्ना ने कहा कि फीस बढ़ोतरी पर कोई भी शिकायत मिलने पर आयोग की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। कहा कि जब हम अपने बच्चों के लिए विद्यालय का चयन करते हैं तो हमें यह समझना होगा कि शिक्षा केवल अंकों और पुस्तकों तक सीमित नहीं है। एक विद्यालय का वास्तविक उद्देश्य बच्चों में संस्कार, अनुशासन और सशक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना होना चाहिए।
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हमें ऐसे विद्यालयों का चयन करना चाहिए जो बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाएं। वहीं, हाल के दिनों में हुई स्कूल बस दुर्घटनाएं और बच्चों के आक्रामक व्यवहार पर चिंता जताते हुए कहा कि ये घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने बच्चों को सही दिशा दे पा रहे हैं। स्पष्ट है कि अब समय आ गया है कि हम शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को जीवन कौशल, भावनात्मक संतुलन और नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा दें। अभिभावकों बच्चों के साथ प्रेम और संवाद बनाए रखें। उन्हें समय दें, उनकी बात सुनें और उनके मित्र बनें।