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Rishikesh: अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस; दर्द, आंसू और अपनापन...मरीजों के लिए फरिस्ते से कम नहीं हैं नर्स

राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Tue, 12 May 2026 03:06 PM IST
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सार

मरीजों के कमजोर शरीर के साथ-साथ उनके टूटे मन को भी नर्स सहारा देती है। कैंसर मरीजों के लिए फरिश्तों से कम नहीं गंगा प्रेम हॉस्पिस का नर्सिंग स्टाफ।

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नर्स - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

गंगा प्रेम हॉस्पिस में जिंदगी की आखिरी दहलीज पर खड़े कैंसर मरीजों के लिए नर्सिंग स्टाफ केवल इलाज करने वाला कर्मचारी नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार बन चुका है। यहां कोई मरीज उन्हें बेटे की तरह दुलारता है, कोई बेटी मानकर सिर पर हाथ फेरता है, तो किसी के लिए यही लोग मां-बाप जैसा सहारा हैं।

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हॉस्पिस में इस समय करीब 19 मरीज भर्ती हैं। इनमें 14 साल का नाबालिग भी है और 95 साल के बुजुर्ग भी। कुछ मरीज ऐसे हैं जिन्हें बीमारी के इस कठिन दौर में अपनों ने बेसहारा छोड़ दिया। ऐसे लोगों के लिए यही नर्सें उनका घर हैं, यही रिश्ते हैं और यही आखिरी उम्मीद भी।
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मरीजों के कमजोर शरीर के साथ-साथ उनके टूटे मन को भी सहारा देती
दिन-रात दर्द से कराहते मरीजों को संभालना आसान नहीं होता। कोई पूरी रात सो नहीं पाता, किसी के जख्म रिसते रहते हैं, तो कोई दर्द और बेबसी में रो पड़ता है। लेकिन हर आंसू पोंछने के लिए यहां नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहता है। समय पर दवा देना, खाना खिलाना, जख्म साफ करना, कपड़े बदलना और डायपर तक साफ करना, वह हर जिम्मेदारी ऐसे निभाते हैं जैसे अपने किसी बेहद करीबी की सेवा कर रहे हों।

वे काम, जिन्हें कई बार अपने भी करने से कतराते हैं, उन्हें यहां की नर्सें बिना किसी शिकन के करती हैं। मरीजों के कमजोर शरीर के साथ-साथ उनके टूटे मन को भी सहारा देती हैं। कई बार दर्द और मानसिक तनाव में मरीज गुस्से में चिल्ला पड़ते हैं, नाराज हो जाते हैं, लेकिन नर्सिंग स्टाफ चेहरे पर मुस्कान और दिल में करुणा लिए चुपचाप उनकी बातें सुनता रहता है।

यहां सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि मानवता का सबसे खूबसूरत रूप दिखाई देता है। अंतिम सांसों की ओर बढ़ रहे मरीजों को यह एहसास तक नहीं होने दिया जाता कि वे अकेले हैं। कोई उनका हाथ थाम लेता है, कोई सिर सहला देता है, तो कोई रातभर उनके पास बैठा रहता है।
 

2005 से हुआ था सफर शुरु
परिचालन अधिकारी पूजा डोगरा बताती है कि वर्ष 2005 में गंगा प्रेम हॉस्पिस संस्था की शुरुआत हुई थी। 2007 में संस्था ने निशुल्क कैंसर शिविर लगाना शुरु किया गया। इसके बाद 2007 में अंतिम चरण के कैंसर मरीजों की होम केयर व 2017 में 15 बेड के साथ गंगा प्रेम हॉस्पिस की शुरुआत की गई। वर्तमान में यहां 25 बेड हैं। यहां सारी सुविधाएं निशुल्क हैं।

होली के रंग से दीपावली के दीप तक मरीजों के साथ नर्स
होली के रंग हों, दीवाली की रोशनी या किसी अन्य पर्व की खुशियां… गंगा प्रेम हॉस्पिस का नर्सिंग स्टाफ हर त्योहार अपने परिवार से पहले मरीजों के साथ मनाता है। यहां भर्ती कैंसर मरीजों को कभी यह महसूस नहीं होने दिया जाता कि वे अकेले हैं या अपनों ने उन्हें छोड़ दिया है।

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- हमारे यहां 19 नर्सिंग स्टाफ है। जो 24 घंटे मरीजों की सेवा में तत्पर रहते हैं। इतना ही नहीं देहरादून, ऋषिकेश व हरिद्वार शहर में करीब 400 अंतिम चरण के कैंसर मरीजों को घर पर भी नर्सिग स्टाफ देखभाल करता है। -पूजा डोगरा, परिचालन अधिकारी, गंगा हॉस्पिस।

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