{"_id":"696d3accc8cd6c1e1c07c39b","slug":"maintaining-impartiality-of-judiciary-is-the-responsibility-of-democracy-justice-bhuyan-dehradun-news-c-5-1-drn1031-882271-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखना लोकतंत्र की जिम्मेदारी : न्यायमूर्ति भुयान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखना लोकतंत्र की जिम्मेदारी : न्यायमूर्ति भुयान
विज्ञापन
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्जल भुयान ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने आम नागरिकों के जीवन से जुड़े अनेक सकारात्मक अधिकारों को मान्यता देकर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की है। लेकिन सशक्त लोकतंत्र के लिए यह भी आवश्यक है कि हम निरंतर स्वयं का मूल्यांकन करें, अपनी कमियों को पहचानें और भविष्य में और बेहतर कार्य करने का संकल्प लें।
न्यायमूर्ति भुयान ने रविवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में भारतीय संविधान के 75 वर्ष विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा, भारतीय संविधान ने सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा में स्थान दिलाकर उन्हें सम्मान, पहचान और अधिकार प्रदान किए हैं और निशब्दों को आवाज दी है। संविधान कोई जड़ दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी आत्मा की रक्षा के लिए समाज और संस्थाओं को सदैव सजग व जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के 75 वर्ष भारतीय लोकतंत्र की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव हैं, इस दौरान न्यायालय ने आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और गरिमामय बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का प्रहरी बताते हुए कहा, भारतीय संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है, जो समाज को असमानता से न्याय और समानता की ओर ले जाने वाला एक परिवर्तनकारी माध्यम है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बहुचर्चित वादों- केशवानंद भारती, इंदिरा गांधी, मेनका गांधी, गोलकनाथ समेत अनेक ऐतिहासिक मामलों के निर्णयों का उल्लेख किया और भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच जे कानिया और न्यायमूर्ति एच आर खन्ना के विचारों और सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। कहा, एक मजबूत न्याय व्यवस्था के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक दृष्टिकोण में लचीलापन और सबसे महत्वपूर्ण रूप से नागरिकों का विश्वास और सम्मान अर्जित करना आवश्यक है, क्योंकि जनता का भरोसा ही न्यायपालिका की वास्तविक ताकत होता है। इस मौके पर ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डाॅ. नरपिंदर सिंह, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डाॅ. अमित आर भट्ट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी सहानी, विवि के प्रो. चांसलर डाॅ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. वाइस चांसलर डाॅ. संतोष एस सर्राफ, कुलसचिव डाॅ. नरेश कुमार शर्मा, डाॅ. डीके जोशी, डाॅ. सुभाष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
Iअपने अनुभवों से छात्रों को किया प्रेरितI
न्यायमूर्ति उज्जल भुयान ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा, आत्मविश्वास एक प्रक्रिया है, जो समय के साथ विकसित होता है। कहा, स्वयं पर संदेह करना स्वाभाविक है, लेकिन धैर्य, खुले विचार और निरंतर प्रयास से व्यक्ति आगे बढ़ता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि यह विधि का क्षेत्र असीम अवसरों से भरा है, इसलिए उन्हें परिवर्तन के लिए तैयार रहना चाहिए और आत्मविश्वास से भरपूर रहना चाहिए। भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित संबंध बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने भविष्य में एआई की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, तकनीकों को न्याय के मार्ग में बाधा नहीं, बल्कि उसे सुलभ और प्रभावी बनाने का सशक्त माध्यम बनाना चाहिए।
Trending Videos
न्यायमूर्ति भुयान ने रविवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में भारतीय संविधान के 75 वर्ष विषय पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा, भारतीय संविधान ने सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा में स्थान दिलाकर उन्हें सम्मान, पहचान और अधिकार प्रदान किए हैं और निशब्दों को आवाज दी है। संविधान कोई जड़ दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसकी आत्मा की रक्षा के लिए समाज और संस्थाओं को सदैव सजग व जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के 75 वर्ष भारतीय लोकतंत्र की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव हैं, इस दौरान न्यायालय ने आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और गरिमामय बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को संविधान का प्रहरी बताते हुए कहा, भारतीय संविधान एक सामाजिक दस्तावेज है, जो समाज को असमानता से न्याय और समानता की ओर ले जाने वाला एक परिवर्तनकारी माध्यम है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बहुचर्चित वादों- केशवानंद भारती, इंदिरा गांधी, मेनका गांधी, गोलकनाथ समेत अनेक ऐतिहासिक मामलों के निर्णयों का उल्लेख किया और भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच जे कानिया और न्यायमूर्ति एच आर खन्ना के विचारों और सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। कहा, एक मजबूत न्याय व्यवस्था के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक दृष्टिकोण में लचीलापन और सबसे महत्वपूर्ण रूप से नागरिकों का विश्वास और सम्मान अर्जित करना आवश्यक है, क्योंकि जनता का भरोसा ही न्यायपालिका की वास्तविक ताकत होता है। इस मौके पर ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डाॅ. नरपिंदर सिंह, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डाॅ. अमित आर भट्ट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी सहानी, विवि के प्रो. चांसलर डाॅ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो. वाइस चांसलर डाॅ. संतोष एस सर्राफ, कुलसचिव डाॅ. नरेश कुमार शर्मा, डाॅ. डीके जोशी, डाॅ. सुभाष गुप्ता आदि मौजूद रहे।
Iअपने अनुभवों से छात्रों को किया प्रेरितI
न्यायमूर्ति उज्जल भुयान ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा, आत्मविश्वास एक प्रक्रिया है, जो समय के साथ विकसित होता है। कहा, स्वयं पर संदेह करना स्वाभाविक है, लेकिन धैर्य, खुले विचार और निरंतर प्रयास से व्यक्ति आगे बढ़ता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि यह विधि का क्षेत्र असीम अवसरों से भरा है, इसलिए उन्हें परिवर्तन के लिए तैयार रहना चाहिए और आत्मविश्वास से भरपूर रहना चाहिए। भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित संबंध बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने भविष्य में एआई की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, तकनीकों को न्याय के मार्ग में बाधा नहीं, बल्कि उसे सुलभ और प्रभावी बनाने का सशक्त माध्यम बनाना चाहिए।

कमेंट
कमेंट X