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Uttarakhand News: कुदरत का बदलता मिजाज...बसंत के आगमन से पहले ही खिल गया बुरांश का फूल

विजयपाल रावत, संवाद न्यूज एजेंसी, नौगांव (उत्तरकाशी)। Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 19 Jan 2026 01:50 PM IST
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सार

बुरांश के फूल का खिलने का समय मार्च-अप्रैल माह होता है, तब उत्तराखंड का राज्य वक्ष बुरांश पूरे सबाब पर होता है, लेकिन इस बार बुरांश समय से पहले ही खिल गया।

Rhododendron flower bloomed even before arrival of spring Uttarakhand weather News
बुरांश का फूल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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औषधीय गुणों का खजाना कहा जाने वाला बुरांश बसंत के आगमन से पहले ही खिल आया है। असमय खिला बुरांश का फूल सिर्फ एक प्राकृतिक घटना ही नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों की ओर इशारा कर रहे हैं। सामान्य समय सीमा से पहले खिलने से बुरांश की गुणवत्ता और उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जिसे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी गम्भीर खतरा माना जा रहा है।

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समुद्रतल से 1500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उगने वाले बुरांश के फूल का खिलने का समय मार्च अप्रैल माह होता है, तब उत्तराखण्ड का राज्य वृक्ष बुरांश पूरे सबाब पर होता है और अपने लाल रंग से पहाड़ियों को लालिमा से भर देता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन की वजह से इस वर्ष जनवरी मध्य से पहले ही बुरांश खिल आया है। जिसे पारिस्थिकी तंत्र के लिए खतरा माना जा रहा।

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कई लोगों का रोजगार प्रभावित
पर्वतीय क्षेत्रों में बुरांश को महिलाओं की आर्थिकी का भी जरिया माना गया है। जंगल पशु चूंगाने जाने वाली महिलाएं चारा पत्ती के साथ बुरांश के फूलों को तोड़ कर लाती हैं और घर पर ही जूस और स्क्वैश बना कर बाजार में बेचती हैं। असमय बुरांश के फूल खिलने की घटना से उत्पादन पर पड़ने वाले असर से कई लोगों का रोजगार भी प्रभावित होगा।

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वहीं राजकीय महाविद्यालय ब्रह्मखाल के प्रधानाचार्य प्रो. रूकम सिंह असवाल ने बताया कि तापमान में वृद्धि और मौसम के पैटर्न में हो रहे बदलाव की वजह से बुरांश अपनी सामान्य समय सीमा से पहले खिल रहा है। जो आने वाले समय में पारिस्थितिकी के लिए खतरा हो सकता है। इससे फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रभाव पड़ सकता है।

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