Uttarakhand Politics: मेयर आरती भंडारी की भाजपा में वापसी से बदले समीकरण, सियासी गलियारों में हलचल हुई तेज
मेयर आरती भंडारी के फिर से भाजपा का दामन थामने से चुनावी समीकरण बदल गए हैं। आरती भंडारी और लखपत भंडारी की एंट्री के बाद सोशल मीडिया से चौक-चौराहों तक बहस छिड़ गई। भाजपा के भीतर भी नए समीकरण नजर आने लगे हैं।
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नगर निगम चुनाव में भाजपा से बगावत, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मुकाबला और जीत के करीब डेढ़ साल बाद फिर उसी पार्टी में वापसी। श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी के बुधवार को भाजपा में शामिल होने के बाद शहर की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं तो भाजपा के भीतर भी इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बनने वाले नए समीकरणों को लेकर चर्चा है। शहर के गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर भी अब बात केवल नगर निगम तक सीमित नहीं है, बल्कि लोग इसके राजनीतिक मायने 2027 के विधानसभा चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं।
नगर निगम चुनाव से पहले लखपत भंडारी व आरती भंडारी भाजपा से जुड़े थे। मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद आरती भंडारी टिकट की दावेदार थीं, लेकिन पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर दोनों ने अलग राह चुन ली। आरती भंडारी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं और चुनाव जीतकर मेयर बनीं। बगावत के बाद पार्टी की ओर से लखपत भंडारी के खिलाफ छह वर्ष के निष्कासन की कार्रवाई भी की गई थी। अब राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू
बुधवार को मेयर आरती भंडारी, लखपत भंडारी और पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के साथ ही नगर निगम में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है। इसके साथ ही चुनाव के समय आमने-सामने रहे नेताओं के एक मंच पर आने को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक समर्थकों के बीच सवाल-जवाब और आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। इस घटनाक्रम का दूसरा पहलू भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जुड़ा माना जा रहा है।
नगर निगम चुनाव में पार्टी के साथ खड़े रहे पुराने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों के बीच नई एंट्री को लेकर क्या समीकरण बनेंगे, इस पर भी नजर रहेगी। हालांकि पार्टी स्तर पर इसे संगठन के विस्तार और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि इस वापसी का असर केवल नगर निगम की राजनीति तक रहेगा या आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ेगा। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, इसलिए फिलहाल किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। बावजूद इसके श्रीनगर में बदले राजनीतिक घटनाक्रम ने भविष्य के समीकरणों को लेकर अटकलों को जरूर हवा दे दी है।
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बगावत से वापसी तक
नगर निगम चुनाव में भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने और अब दोबारा भाजपा में आने तक आरती भंडारी और लखपत भंडारी का राजनीतिक सफर चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि बुधवार की ज्वाइनिंग को सामान्य दल-बदल के बजाय स्थानीय राजनीति के बदले समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पार्टी संगठन के भीतर जिम्मेदारियों और राजनीतिक तालमेल की तस्वीर साफ होने के साथ ही इसके वास्तविक असर का भी आकलन हो सकेगा।