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रामपुर तिराहा कांड: 32वीं बरसी, शहीद आंदोलनकारियों के मामले में संवेदनशीलता पर एक बार फिर उठने लगे सवाल

Wed, 30 Sep 2026 10:35 AM IST
Renu Saklani बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 30 Sep 2026 10:35 AM IST
सार

राज्य आंदोलन की उस दर्दनाक घटना को 32 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन शहीदों के सम्मान से जुड़ा मामला अब भी अधूरा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जारी शासनादेश में सभी शहीदों के बजाय केवल चार की मूर्तियां लगाने का आदेश सामने आया है।

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Rampur tiraha kand questions over delay in installing statues of uttarakhand statehood martyrsRampur tiraha ka
सांकेतिक - फोटो : सूचना

विस्तार

उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों के प्रति शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। रामपुर तिराहा गोलीकांड के शहीदों की मूर्तियों की स्थापना की दो साल पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी, इसके बाद भी मूर्तियां नहीं लगीं। हालांकि शासन की ओर से इसका आदेश जारी किया गया, इसमें सभी शहीदों की मूर्तियां लगाने के बजाय केवल चार की मूर्तियों को ही स्थापित किए जाने की बात कही गई है। इस आदेश के सामने आने के बाद राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों के परिवारों में गहरी नाराजगी है।

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राज्य आंदोलन के दौरान दो अक्तूबर 1994 को उत्तराखंड अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर गोलीबारी की थी। पुलिस की इस गोलीबारी में सात आंदोलनकारी रविंद्र सिंह रावत, सत्येंद्र चौहान, गिरीश भद्री (भंडारी), राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल (सूर्य कुमार शर्मा), राजेश नेगी और अशोक कुमार शहीद हो गए थे।

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केवल चार की मूर्तियां लगाने का निर्णय किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं
दो अक्तूबर 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहे में बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए सभी की मूर्तियां स्थापित करने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के बाद शासन ने संस्कृति निदेशालय को रामपुर तिराहे पर चार शहीदों की मूर्तियां शहीद स्थल पर स्थापित करने का आदेश किया है। सात में से यह चार कौन हैं, आदेश में इसका भी जिक्र नहीं है।
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राज्य आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि सरकार का यह रवैया बलिदानियों का अपमान है। उन्होंने राज्य के लिए अपना खून बहाया था, ऐसे में केवल चार की मूर्तियां लगाने का निर्णय किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश में संशोधन कर सभी शहीद आंदोलनकारियों की मूर्तियां न लगाई गईं तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

मैं खुद रामपुर तिराहा गोलीकांड का गवाह हूं, मेरे सामने निहत्थे राज्य आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोलियां बरसाई थी, शहीदों की मूर्तियां स्थापित करने के आदेश में विसंगति है तो इसका परीक्षण कर यहां शहीद हुए सभी आंदोलनकारियों की मूर्तियों को सीएम की घोषणा के अनुरूप लगाना चाहिए। आज ही इस पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री धामी के संज्ञान में लाया जाएगा। - रविंद्र जुगरान, राज्य आंदोलनकारी

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रामपुर तिराहा गोलीकांड में सात राज्य आंदोलनकारी शहीद हुए थे, तो सभी सात की मूर्तियां लगाई जाएंगी। शासनादेश में गलती से सात का चार हो गया होगा, इसे दिखवाया जाएगा कि ऐसा कैसे हुआ। मूर्तियां स्थापित करने में समय लगता है, इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया है। - युगल किशोर पंत, सचिव संस्कृति

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