सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Rishikesh AIIMS Before passing away Raghu gave gift of life to five people and also donated his eyes to two pe

Rishikesh: रघु ने जाते-जाते पांच लोगों को दिया जीवनदान, आंखें भी की दान, एम्स में हुई डोनेशन की प्रक्रिया

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 23 Jan 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
सार

लाख प्रयासों के बावजूद जब बिहार निवासी रघु कोमा से वापिस नहीं आए तो विभिन्न जांचों के बाद उनको ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। एम्स के चिकित्सकों की एक टीम ने रघु के परिजनों से संपर्क कर उन्हें अंगदान के प्रति प्रेरित किया। 

Rishikesh AIIMS Before passing away Raghu gave gift of life to five people and also donated his eyes to two pe
एम्स ऋषिकेश - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी के जीवन की नई शुरुआत भी हो सकती है। ऋषिकेश के 42 वर्षीय रघु पासवान ने जाते-जाते इस बात को सच कर दिखाया है। ब्रेन डेड होने के बाद भी रघु ने पांच जिंदगियों में उम्मीद का उजाला भरा है। एम्स ऋषिकेश में संपन्न हुए इस कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो सदियों तक याद रखी जाएगी।

Trending Videos


मूल रूप से बिहार का रहने वाला रघु पासवान राजमिस्त्री थे। हाल ही में कुछ दिन पहले हुई एक दुर्घटना के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आ गई। स्थिति नाजुक होने पर उन्हें अगले दिन एम्स में भर्ती कराया गया लेकिन इससे पहले कि ट्राॅमा सर्जन सर्जरी की तैयारी करते, रघु नॉन-रिवर्सिबल कोमा में चले गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीश अरोड़ा ने बताया कि लाख प्रयासों के बावजूद जब वह कोमा से वापिस नहीं आए तो विभिन्न जांचों के बाद उनको ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। एम्स के चिकित्सकों की एक टीम ने रघु के परिजनों से संपर्क कर उन्हें अंगदान के प्रति प्रेरित किया। साथ ही ऋषिकेश मेयर शंभू पासवान ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई।

परिजनों के राजी होने पर ब्रेन डेड रघु के अंगदान का फैसला लिया गया। प्रक्रिया के बाद रघु के अंगदान से अब न केवल 5 लोगों की जिंदगी वापिस लौट आएगी बल्कि दृष्टि खो चुके 2 अन्य लोग भी अब रघु की आंखों से जीवन का उजियारा देख सकेंगे।

एम्स के प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. भारत भूषण भारद्वाज ने बताया कि रघु के अंगदान से 3 अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती 5 लोगों को नया जीवन मिल सकेगा। इनमें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती 3 अलग-अलग व्यक्तियों को किडनी, लीवर और पेन्क्रियाज, एम्स दिल्ली में भर्ती रोगी को रघुवीर की दूसरी किडनी और आर्मी हॉस्पिटल आरआर दिल्ली में भर्ती एक रोगी का हार्ट प्रत्यारोपित किया जाना है। उन्होंने बताया कि रघुवीर ने अपनी दोनों आंखें भी दान की हैं। निकाली गयी दोनों काॅर्निया को एम्स के आई बैंक में सुरक्षित रखवा दिया गया है। जिन्हें शीघ्र ही जरूरतमंदों की आंखों में प्रत्यारोपित कर दिया जाएगा।

चिंतन शिविर एवं डायलॉग ऑन विजन 2047: सीएम बोले, विकसित भारत के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगा उत्तराखंड का विजन

ग्रीन कॉरिडोर के लिए ली 9 जनपदों की पुलिस की मदद
डाॅ. भारत ने बताया कि विभिन्न अंगों को निर्धारित समय के भीतर गंतव्य तक पंहुचाने के लिए उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस से ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए मदद ली गई। ताकि सभी अंगों की निश्चित समय के भीतर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। इसमें एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, ऋषिकेश से दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित अस्पताल तक का रूट शामिल था। अपराह्न समय अस्पताल प्रशासन द्वारा सम्मान के साथ रघुवीर की देह एम्स ऋषिकेश से गंतव्य स्थान के लिए भिजवाई गई।

इन डाॅक्टरों की रही विशेष भूमिका
इस प्रक्रिया में एम्स के न्यूरो सर्जन डाॅ. रजनीश अरोड़ा के अलावा डाॅ. संजय अग्रवाल, डाॅ. रोहित गुप्ता, डाॅ. अंकुर मित्तल, डाॅ. करमवीर, डाॅ. नीति गुप्ता, डाॅ. मोहित धींगरा, डाॅ. लोकेश अरोड़ा, डाॅ. आशीष भूते और डाॅ. आनन्द नागर आदि विशेषज्ञ शामिल थे। संस्थान में अंग प्रत्यारोपण इकाई के समन्वयक देशराज सोलंकी व डीएनएस जीनू जैकेब की टीम का सहयोग रहा जबकि संस्थान के पीआरओ डाॅ. श्रीलोय मोहन्ती और डीएमएस डाॅ. रवि कुमार आदि ने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो ) और संबंधित जिला प्रशासन व अस्पतालों सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया में विशेष भूमिका निभाई।

एम्स ऋषिकेश में कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 2 अगस्त 2024 को हरियाणा के रहने वाले एक 25 वर्षीय कांवड़िये के अंगदान की प्रक्रिया भी इसी संस्थान में सकुशल संपन्न हुई थी। रघुवीर भले ही अब दुनिया में नहीं है लेकिन वह अनेक लोगों कोे जीवन दान दे गए हैं। वह मरकर भी अमर हैं। अंगदान महादान है। हमें चाहिए कि हम समाज में भी लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करें। इस प्रक्रिया में शामिल डाॅक्टरों की टीम का कार्य प्रशंसनीय है।
- प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed