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श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: चार सितंबर को जन्माष्टमी पर निशीथ काल में होगी लड्डू गोपाल की विशेष पूजा, बन रहा खास योग

Wed, 02 Sep 2026 10:48 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 02 Sep 2026 10:48 PM IST
सार

श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए निशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व है। निशीथ पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि का क्षण 12:17 बजे तक है।

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Shri Krishna Janmashtami 2026 Special worship of Laddu Gopal will take place duringNishith Kaal
जन्माष्टमी 2026 - फोटो : amar ujala

विस्तार

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस वर्ष चार सितंबर को मनाई जाएगी। इस दौरान अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग रहेगा। निशीथ काल में श्री कृष्ण की विशेष पूजा की जाएगी। देशभर के मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा, भजन-कीर्तन और विशेष शृंगार की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

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आचार्य डॉ सुशांत राज ने बताए कि जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष अष्टमी तिथि चार सितंबर को सुबह करीब 2:25 बजे शुरू होगी और पांच सितंबर को रात करीब 12:13 बजे समाप्त होगी। इसलिए ज्यादातर जगहों पर चार सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
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आचार्य डॉ सुशांत राज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए निशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व है। निशीथ पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि का क्षण 12:17 बजे तक है।
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बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था चार सितंबर को रोहिणी नक्षत्र 12:29 बजे से शुरू होकर रात 11:04 बजे तक रहेगा। आचार्य डॉ सुशांत राज ने बताए कि रात में निशीथ काल के समय भगवान श्रीकृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और शृंगार कर माखन-मिश्री, फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। इसके साथ ही श्रीकृष्ण के मंत्र और भजन का जाप करें।

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