Ted Talk: चेतन भगत, उर्वशी रौतेला सहित जानीमानी हस्तियों ने युवाओं को दिखाई कामयाबी की राह, पढ़िए ये खास बातें
बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने कहा कि उत्साह से जीने के लिए कोई उम्र तय नहीं है। अपनी शर्तों पर जिंदगी जीनी चाहिए। अपनी सोच को नए विचारों के स्वागत के लिए खुला रखना चाहिए। रचनात्मक कार्यों के लिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर की कहानियों को सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। अंतर्मुखी लोग बहुत प्रतिभाशाली होते हैं, दूसरों को उनकी प्रतिभा का आदर करते हुए उसे सामने लाना चाहिए।
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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुुधांशु त्रिवेदी, प्रख्यात उपन्यासकार चेतन भगत, उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ, संजीव चोपड़ा, अभिनेत्री उर्वशी रौतेला, ग्राफिक एरा के संस्थापक डॉ. कमल घनशाला, प्रसिद्ध पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट समेत अनेक हस्तियों ने नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के गुर सिखाए।
अशोक कुमार ने कहा कि सफलता के मायने हर किसी के लिए अलग-अलग होते हैं। सफलता कई चीजों पर निर्भर करती है, इनमें हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क मुख्य हैं। इसके साथ ही कामयाबी के अर्जुन जैसे लक्ष्य केंद्रित प्रयास और जुनून भी जरूरी है। ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला ने अपना उदाहरण देते हुए युवाओं को जिंदगी में कामयाबी पाने के गुर समझाए।
युवाओं की हौसलाफजाई की
उन्होंने कहा कि सफलता की राह में मुश्किलें और चुनौतियां आती हैं। इनका सामना करने के लिए परिश्रम, धैर्य और जुनून जरूरी है। डॉ. घनशाला ने गीत की पंक्तियां ‘रुक जाना नहीं तू कहीं हार के, कांटों पर चलके मिलेंगे साए बहार के...’ सुनाकर युवाओं की हौसलाफजाई की। पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने हिमालय और नदियों की महत्ता का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण के फायदों को समझाया। कहा कि भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सजग होने की आवश्यकता है। पहले जंगलों और बुग्यालों में शोर मचाना भी बुरा माना जाता था, इस मान्यता के पीछे प्रकृति को डिस्टर्ब न करने की भावना होती थी। अब रोजाना जंगलों, पहाड़ों और बुग्यालों में हेलीकॉप्टरों का शोर गूंजता है। प्रकृति से जितनी कम छेड़छाड़ की जाएगी, जीवन उतना ही सुखद रहेगा। सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. संजीव चोपड़ा, दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव, डॉ. ए के सिंह, आदित्य सत्संगी, सम्यक चक्रवर्ती, समीक्षा सजवाण, आयुर्वेदाचार्य अमित वर्मा, ब्लॉक चेन विशेषज्ञ कमलेश नागवाड़े, प्रसिद्ध गायक प्रीतम भरतवाण ने भी युवाओं का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन साहिब सबलोक ने किया।
शिक्षा से ज्यादा मोटीवेशन जरूरी : डॉ सुधांशु
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि सफलता के लिए केवल शिक्षा काफी नहीं है। बिना मोटीवेशन के शिक्षा विनाश की वजह भी बन सकती है। त्रिवेदी ने अमेरिका के वर्ष 1945 में परमाणु क्षमता हासिल करने के प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि जो नहीं दिखता, वह भी सच हो सकता है। आगे बढ़ने वाले उसे भी देखते हैं, जो सहज ही नहीं दिखाई देता। डॉ. सुधांशु ने शून्य के आविष्कार और उससे जुड़े विवादों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आर्यभट्ट की किताब में शून्य का उल्लेख पाकर दुनिया ने उसे उसी दौर की खोज मान लिया, लेकिन भारत में शून्य की खोज महाभारत काल से पहले हो चुकी थी। उत्तराखंड को पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए उन्होंने एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के हताश होकर कैंची धाम आने और वहां से प्रेरणा, ऊर्जा पाकर बुलंदियों तक पहुंचने के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि भारत भविष्य में विश्व गुरु बनेगा, क्योंकि यहां की शिक्षा मूल्यों से जुड़ी है और दुनिया इसे स्वीकार करने लगी है। भारत पूरी दुनिया के लिए मोटीवेशन का केंद्र बनेगा।
सफल होंगे तो लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे : चेतन भगत
प्रसिद्ध उपन्यासकार चेतन भगत ने कहा कि अपने लिए जीएं। दुनिया, समाज और परिवार क्या सोचेगा, इसकी परवाह करने से पहले ये सोचें कि आपको किससे खुशी मिलती है। जिस तरह विमान में सहयात्रियों को मास्क लगाने से पहले खुद मास्क लगाने की हिदायत दी जाती है, उसी तरह आप अपनी खुशी के बारे में पहले सोचेंगे और जब आप सफल होंगे, तो लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि आजकल कोई इसकी चिंता नहीं करता कि आप क्या कर रहे हैं और कितना कमा रहे हैं। लोग सोचना ही भूल गए हैं। वास्तविकता यह कि आज सब मोबाइल में खोए रहते हैं। ऐसा हो सकता है कि आप अपनी खुशी का कार्य करेंगे तो उसका परिणाम सबके लिए अच्छा होगा और दूसरों का आप अच्छे से ख्याल रख पाएंगे। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे पैसे के पीछे भाग रहे थे, तब अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाए।
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उत्साह से जीने के लिए कोई उम्र तय नहीं : उर्वशी रौतेला
बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने कहा कि उत्साह से जीने के लिए कोई उम्र तय नहीं है। अपनी शर्तों पर जिंदगी जीनी चाहिए। अपनी सोच को नए विचारों के स्वागत के लिए खुला रखना चाहिए। रचनात्मक कार्यों के लिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर की कहानियों को सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। अंतर्मुखी लोग बहुत प्रतिभाशाली होते हैं, दूसरों को उनकी प्रतिभा का आदर करते हुए उसे सामने लाना चाहिए। बहिर्मुखी लोगों को दूसरों के विचारों का भी सम्मान करना चाहिए। आमतौर से लोग स्ट्रेस को शत्रु मानते हैं, लेकिन कामयाबी के लिए जरूरी है कि सोच को सकारात्मक रखा जाए और स्ट्रेस से घबराना नहीं चाहिए। उर्वशी ने कहा कि दुनिया के युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए टेड पर यह उनका पहला प्रयास है और उनके लिए खुशी की बात है कि यह उनके राज्य के प्रमुख एवं देश के प्रतिष्ठित ग्राफिक एरा विवि में हुआ।