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Dehradun News: सांस्कृतिक पहचान की धरोहर हैं पारंपरिक वस्त्र कलाएं
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देहरादून। ग्राफिक एरा हिल विवि में विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की पारंपरिक वस्त्र कलाएं सांस्कृतिक पहचान की धरोहर हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और टिकाऊ तौर-तरीकों से भविष्य के लिए सहेजा जा सकता है। शुक्रवार को विवि में हिमालयी वस्त्र परंपरा, तकनीक और टिकाऊ भविष्य पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग रिसर्च सेंटर (टीसीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. अनामिका पाठक ने कहा कि असम से लेह-लद्दाख तक फैला हिमालयी क्षेत्र वस्त्र परंपराओं का अनूठा खजाना है। पश्मीना, कपास और बिच्छू घास (नेटल) जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बने वस्त्र यहीं की पहचान हैं, जिन्हें युवा नवाचार से बाजार तक पहुंचा रहे हैं। अरुणाचल, सिक्किम और लद्दाख के वस्त्रों में बौद्ध प्रतीकों की झलक प्राचीन व्यापार मार्गों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दर्शाती है।
पंजाब, बनारस और पहाड़ी कढ़ाई के बाद यह पहल इसी विरासत को सहेजने का प्रयास है। विवि की कुलपति डॉ. तबस्सुम नकवी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की वस्त्र परंपराएं समृद्ध संस्कृति, विरासत और शिल्पकौशल की प्रतीक हैं। इन परंपराओं को आधुनिक तकनीक, नवाचारी डिजाइन और टिकाऊ विकास से जोड़ते हुए सहेजना हमारी जिम्मेदारी है। संगोष्ठी में विवि के कुलसचिव डॉ. ज्योति छाबड़ा, डीन ऑफ एकेडमिक्स डॉ. प्रमोद नायर, राजीव कुमार सोलंकी, डॉ. बानी झा समेत शिक्षक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
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समारोह में मुख्य अतिथि टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग रिसर्च सेंटर (टीसीआरसी) के अध्यक्ष डॉ. अनामिका पाठक ने कहा कि असम से लेह-लद्दाख तक फैला हिमालयी क्षेत्र वस्त्र परंपराओं का अनूठा खजाना है। पश्मीना, कपास और बिच्छू घास (नेटल) जैसे प्राकृतिक संसाधनों से बने वस्त्र यहीं की पहचान हैं, जिन्हें युवा नवाचार से बाजार तक पहुंचा रहे हैं। अरुणाचल, सिक्किम और लद्दाख के वस्त्रों में बौद्ध प्रतीकों की झलक प्राचीन व्यापार मार्गों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को दर्शाती है।
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पंजाब, बनारस और पहाड़ी कढ़ाई के बाद यह पहल इसी विरासत को सहेजने का प्रयास है। विवि की कुलपति डॉ. तबस्सुम नकवी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की वस्त्र परंपराएं समृद्ध संस्कृति, विरासत और शिल्पकौशल की प्रतीक हैं। इन परंपराओं को आधुनिक तकनीक, नवाचारी डिजाइन और टिकाऊ विकास से जोड़ते हुए सहेजना हमारी जिम्मेदारी है। संगोष्ठी में विवि के कुलसचिव डॉ. ज्योति छाबड़ा, डीन ऑफ एकेडमिक्स डॉ. प्रमोद नायर, राजीव कुमार सोलंकी, डॉ. बानी झा समेत शिक्षक और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
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