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उत्तराखंड: राज्य सहकारी नीति-2026 को धामी कैबिनेट की मंजूरी; ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

Wed, 26 Aug 2026 01:13 AM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Wed, 26 Aug 2026 01:13 AM IST
सार

नीति पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों जैसे छोटी जोतें, बिखरी आबादी, पलायन और सीमित औद्योगिकीकरण को संबोधित करती है। नई नीति सहकारिता को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिए विशेष प्रबंध करती है।

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Uttarakhand Dhami Cabinet approves State Cooperative Policy-2026 rural economy to get a boost
आदेश जारी - फोटो : freepik.com

विस्तार

उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026 को धामी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। नीति का उद्देश्य प्रदेश में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, स्थानीय उद्यमिता और रोजगार सृजन को मजबूत करना है। नई व्यवस्था सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह नीति राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की मूल भावना सहकार से समृद्धि को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

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नीति पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों जैसे छोटी जोतें, बिखरी आबादी, पलायन और सीमित औद्योगिकीकरण को संबोधित करती है। नई नीति सहकारिता को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय उद्यमिता की मजबूती के लिए विशेष प्रबंध करती है। सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के मुताबिक सरकार का लक्ष्य केवल सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है। उन्होंने सहकार से समृद्धि के मंत्र के साथ हिमालयी सहकारिता मॉडल की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
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पैक्स बनेंगे बहुउद्देशीय केंद्र
नीति के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को अब केवल ऋण देने वाली संस्थाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इन्हें बहुउद्देशीय, आत्मनिर्भर और व्यावसायिक ग्रामीण आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि, उद्यान, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण और कोल्ड-चेन जैसी सेवाएं मिलेंगी। डिजिटल बैंकिंग, बीमा और पेंशन जैसी ग्रामीण सेवाएं भी सहकारी नेटवर्क से जुड़ेंगी। हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ा जाएगा।

डिजिटल व्यवस्था और क्रियान्वयन योजना
इस नीति के तहत सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कार्यप्रणाली और रियल-टाइम लेखांकन को बढ़ावा दिया जाएगा। डिजिटल बैंकिंग, नियमित वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट एवं पेशेवर प्रबंधन पर जोर रहेगा। जिला सहकारी बैंकों में क्लाउड सीबीएस और मोबाइल-फर्स्ट डिजिटल बैंकिंग जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू होंगी। इस नीति का क्रियान्वयन वर्ष 2026 से 2036 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहले चरण में विधिक सुधार और डिजिटलीकरण पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि अंतिम चरण में उत्तराखंड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों में अग्रणी राज्य बनाना है।

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