अमर उजाला की पहल जीवांजलि : विचारों से बदलाव तक के तहत सोमवार को ग्राफिए एरा के सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें आध्यात्मिक कथावाचक जया किशोरी ने जीवन, संस्कार, परिवार, युवाओं, सफलता और अध्यात्म से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संस्कार, संयम, संवेदनशीलता, भक्ति और अध्यात्म बुढ़ापे के लिए नहीं हैं। हमारे यहां संस्कार बचपन में सिखाए जाते हैं। कल क्या होगा, हमें नहीं पता, लेकिन हम अपनी जिंदगी के महत्वपूर्ण काम भविष्य के लिए छोड़ देते हैं।
अमर उजाला जीवांजलि: जया किशोरी ने बताया बेहतर इंसान बनने का मंत्र, कहा- संस्कार, संयम और संवेदनशीलता रखें
जया किशोरी ने कहा कि हमने अपने काम को ही अपनी दुनिया बना लिया है। युवाओं को लगता है कि अच्छे नंबर नहीं आए तो जिंदगी खत्म हो गई। जबकि नंबर पढ़कर आते हैं, किसी भी तरह के जाेड़ तोड़ से नहीं आते।
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रास्ते कई हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक होनी चाहिए
आध्यात्मिक कथावाचक जया किशोरी ने युवाओं से कहा कि अपना लक्ष्य चुनें। अगर आपको कुछ बनना है तो रास्ते कई हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक होनी चाहिए। आज के समय में ऐसा नहीं है। पुराने समय में हर चीज धैर्य के लिए बनाई गई थी। मंजिल के साथ हमें उसकी यात्रा के लिए भी सोचना होगा। उन्होंने कहा कि पहले शादी बहुत लंबी चलती थी, लेकिन जल्दी में हुई शादी जल्दी-जल्दी खत्म हो रही है। ऐसे ही जल्दी-जल्दी में बनाया जा रहा कॅरिअर भी जल्दी खत्म हो रहा है। उन्होंने प्रसिद्धि और सफलता के अंतर को समझाते हुए कहा कि कई बार लोग आपको इसलिए फॉलो करते हैं क्योंकि आप उनका मनोरंजन कर रहे हैं। हर प्रसिद्ध व्यक्ति सफल नहीं होता, पर हर सफल व्यक्ति प्रसिद्ध हो सकता है। आजकल प्रसिद्धि बहुत आसानी से मिल जाती है, बस कुछ भी अटपटा कर लो।
किसी के जीवन में अच्छा बदलाव लाना ही सफलता
उन्होंने कहा कि सफलता की कोई परिभाषा नहीं है। मेरी नजर में अगर आपके कारण किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी एक अच्छा बदलाव आए, तो वह सफलता है। सफलता हमारे इंसान होने की है। उन्होंने कहा कि भक्ति का मतलब कुछ छोड़ना या बैरागी बन जाना नहीं है। भगवान ने भागवत गीता में कभी कुछ छोड़ने के लिए नहीं कहा। हम जो भी छोड़ते हैं, वह बाहरी है। बदलाव अंदरूनी होता है। उन्होंने व्रत (उपवास) का अर्थ समझाते हुए कहा कि पहले व्रत का मतलब होता था उस दिन अपनी इच्छाओं का त्याग करना, लेकिन आज सिर्फ भोजन छोड़ते हैं। व्रत का मतलब खाना छोड़ना नहीं, बल्कि बुरे विचारों को छोड़ना होता है।
कमल की तरह बनें, परिस्थितियों में रहते हुए भी उनसे ऊपर उठें
जया किशोरी ने कहा कि हमें कमल की तरह बनना चाहिए। कमल पर पानी मोती की तरह चमकता है। कमल कभी पानी को ग्रहण नहीं करता। यही बैराग्य है। उन्होंने कहा कि खुद को याद दिलाना भी जरूरी है कि समाज में जो चल रहा है, वह ऊपर वाले का बनाया गया नाटक है। हमें अपना जीवन ऐसे जीना चाहिए कि जब हम इस धरती से जाएं तो लोग कहें मूवी सुपरहिट थी। उन्होंने कहा कि भक्ति शक्ति लेकर आती है। भगवान हर इंसान से कहता है तू कर, मैं संभाल लूंगा। जो दुनिया चला रहा है, उसका एकमात्र काम मेरा ध्यान रखना है। भक्ति से ही धैर्य और संस्कार आते हैं।
याद की हुई चीजें संस्कार नहीं, जीवन में उतरी सीख संस्कार
जया किशोरी ने कहा कि याद की हुई चीज संस्कार नहीं होते। संस्कार आपके जीवन मूल्य और नैतिक मूल्य क्या हैं, यह है। आपके संस्कारों की परीक्षा आपके शांत रहने में होती है। कहा कि हमारे बुजुर्ग पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन बहुत अच्छे से परिवार चलाते थे। अगर आप अपना परिवार अच्छे से चला पा रहे हैं तो आप पढ़े-लिखे हैं। हमारे जीवन मूल्य कोई और तय नहीं करता, व्यक्ति खुद तय करता है, क्योंकि हमें सबको पता होता है कि क्या सही है और क्या गलत। जब हम सही होते हैं तो हमारे दिमाग में सही-गलत नहीं चलता। जो काम किसी की नींद खराब कर दे या चैन खराब कर दे, वह काम अच्छा नहीं है। जब लगे कि कोई चीज सोने नहीं देती तो एक बार बैठकर जरूर सोचना चाहिए।