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Uttarakhand: 54 मदरसों में से 30 में हाईस्कूल इंटर स्तर पर एक भी छात्र नहीं, एक जुलाई से खत्म हो रहा बोर्ड

बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 30 Mar 2026 07:11 AM IST
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सार

मदरसा बोर्ड को एक जुलाई से खत्म कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। राज्य में 452 मदरसे हैं। इनमें से 54 मदरसे ऐसे हैं, जिनमें नौंवी से 12 वीं तक मान्यता प्राप्त हैं।

Uttarakhand Madrasa 30 out of 54 madrasas do not have a single student at high school and intermediate level
मदरसा - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

प्रदेश में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 54 मदरसों में से 30 में मुंशी (हाईस्कूल) और आलिम (इंटर स्तर) पर एक भी छात्र नहीं है। जबकि अन्य 24 में भी इस स्तर पर छात्र-छात्राओं की संख्या बहुत कम है। मदरसा आईशा सिद्दीका लंढौरा के प्रबंधक अब्दुस्लाम बताते हैं कि एक जुलाई से मदरसा बोर्ड खत्म हो रहा है। इसी डर से छात्र-छात्राओं ने मुंशी और आलिम स्तर पर मदरसों में दाखिला नहीं लिया।

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प्रदेश के मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से मदरसा बोर्ड को एक जुलाई से खत्म कर दिया जाएगा। जबकि इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह गांधी बताते हैं कि राज्य में 452 मदरसे हैं। इनमें से 54 मदरसे ऐसे हैं, जिनमें नौंवी से 12 वीं तक मान्यता प्राप्त हैं।

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शैक्षिक सत्र 2025–26 में सूचीबद्ध 54 मदरसों में से केवल 24 मदरसों में ही छात्रों का पंजीकरण हुआ है, जबकि शेष 30 मदरसे इस स्तर पर छात्रविहीन हैं। इसमें आलिम स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। इस स्तर पर इस सत्र में प्रदेशभर में मात्र 83 छात्र नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। जबकि 16 छात्रों ने निजी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दी है।

कम छात्रों की वजह से मान्यता पर खतरा

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त नौंवी से 12वीं तक के 54 मदरसों में से अधिकतर की मदरसा बोर्ड से मान्यता को खतरा बना है। मान्यता के लिए नियम यह है कि मुंशी, मौलवी के विद्यार्थियों की संख्या 30 से कम नहीं होनी चाहिए। जबकि उच्चतर कक्षा की मान्यता के लिए वर्तमान वर्ष में न्यूनतम 10 परीक्षार्थियों का परीक्षा में शामिल होना जरूरी है। डॉ.गांधी बताते हैं कि कक्षा नौंवी से 12वीं तक के 54 मदरसों में से मात्र नौ मदरसे ही मान्यता के मानकों पर खरे उतर रहे हैं।

नया सत्र एक से, संबद्धता एक की भी नहीं

प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र 2026-27 शुरू हो जाएगा लेकिन अब तक एक भी मदरसे को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता नहीं मिली। ऐसे में मदरसों के बच्चे कोर्स पूरा करने में पिछड़ सकते हैं। डॉ.गांधी का कहना है कि पहले चरण में बैठकें कर मदरसों की समस्याओं को सुना जा रहा है। इसके बाद उनकी सरकारी विद्यालयी शिक्षा से संबद्धता का प्रयास किया जाएगा।

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बोर्ड से संबद्धता पर बढ़ेगी छात्र संख्या

डॉ.गांधी का कहना है कि मदरसों की उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता के बाद इनमें छात्रों की संख्या बढ़ेगी। वहीं, इनमें कोर्स को लेकर कमेटी बना दी गई है जो तय करेगी कि धार्मिक शिक्षा में इन्हें क्या और कितना पढ़ाया जाएगा।

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