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उत्तराखंड: 85% अल्पसंख्यक छात्र नहीं, फिर भी दर्जे का लाभ ले रहे संस्थान, मान्यता के लिए नहीं आए आगे

Wed, 14 Oct 2026 11:07 AM IST
Renu Saklani बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 14 Oct 2026 11:07 AM IST
सार

उत्तराखंड में मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में 85 फीसदी अल्पसंख्यक छात्रों के पंजीकरण की शर्त ने मान्यता के मामले में नई तस्वीर सामने रखी है। प्रदेश के अधिकतर संस्थान अब तक प्राधिकरण से मान्यता लेने नहीं पहुंचे हैं। इससे अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिल रही सुविधाओं और संस्थानों की पात्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

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Uttarakhand minority schools 85% minority student rule raises questions over minority status benefits madrasa
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रदेश के मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में 85 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र नहीं हैं, इसके बाद भी ऐसे अधिकतर संस्थान इस दर्जे का लाभ ले रहे हैं। मामला तब सामने आया जब सरकार ने प्राधिकरण से मान्यता नवीनीकरण के लिए 85 फीसदी अल्पसंख्यक छात्रों के पंजीकरण की शर्त लगा दी गई।

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मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए सरकार की ओर से करीब आठ माह पहले राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। लेकिन मदरसों को छोड़ अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश में अब तक केवल दो संस्थानों ने प्राधिकरण से मान्यता ली है।
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इससे इन संस्थानों की पात्रता और अल्पसंख्यक दर्जे के आधार पर मिल रही सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियमानुसार अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा हासिल करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक ऐसे में जिन संस्थानों में 85 प्रतिशत अल्पसंख्यक छात्र नहीं हैं, उनके अल्पसंख्यक दर्जे और उससे मिलने वाली छूट की वैधता की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। सवाल यह है कि जब बड़ी संख्या में संस्थान निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें अल्पसंख्यक संस्थान के तौर पर किस आधार पर छूट मिल रही है।

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यह है स्थिति

प्रदेश में 452 मदरसे और 91 अन्य अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान हैं। इनमें 27 माध्यमिक और 64 बेसिक स्तर के हैं। इनमें से 35 मदरसों और दो अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों ने ही प्राधिकरण से मान्यता ली है।

गैर अल्पसंख्यक समुदाय के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होने चाहिए छात्र

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता संबंधी नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि मान्यता नवीनीकरण के लिए अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान पिछले तीन साल के प्रवेश रजिस्टर की प्रति देंगे। वे यह स्वघोषणा पत्र देंगे कि संस्थान में पिछले तीन साल में गैरअल्पसंख्यक समुदाय के 15 प्रतिशत से अधिक छात्र नामांकित नहीं थे। वहीं, शिक्षण संस्थानों को हर तीन साल में मान्यता का नवीनीकरण कराना होगा।

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मान्यता के लिए संस्थान में 85 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र होने चाहिए, संस्थानों को सभी मानकों को पूरा करते हुए शीघ्र मान्यता लेनी चाहिए। - डॉ.सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

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