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Uttarakhand: मानसून में आपदा से हुआ भारी नुकसान, राज्य ने केंद्र को 15 हजार करोड़ की भेजी रिपोर्ट

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 11 Jan 2026 11:20 PM IST
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सार

अप्रैल से दिसंबर-2025 तक प्राकृतिक आपदा में 136 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा घटनाओं में 162 घायल और 86 लोग लापता हुए थे।

Uttarakhand News state suffered losses due to disasters Government sent a report to the central government
आपदा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राज्य में मानसून में हुई आपदा के बाद शुरू हुआ पोस्ट डिजास्टर नीड एस्समेंट (पीडीएनए) का काम पूरा हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को करीब 15 हजार करोड़ की रिपोर्ट भेजी है।

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पिछले साल आपदा में जानमाल का भारी नुकसान हुआ था। अप्रैल से दिसंबर-2025 तक प्राकृतिक आपदा में 136 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा घटनाओं में 162 घायल और 86 लोग लापता हुए थे। आपदा के चलते 7420 भवनों को क्षति हुई थी। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से राज्य में 24 सितंबर से पीडीएनए का काम शुरू किया गया। इसका उद्देश्य आपदा से हुई क्षति का आकलन कर एक समग्र पुनर्वास और पुनर्निर्माण रणनीति तैयार करना था।
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पीडीएनए के लिए एनडीएमए, राज्य व जिलेस्तर पर विशेषज्ञों को शामिल करते हुए चार टीमें बनाई गई थी। टीमों ने जिलों में पहुंचकर सर्वे किया था। इसके बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप देने काम चल रहा था। एनडीएमए ने पीडीएनए का प्रस्ताव भेजने के लिए 31 दिसंबर का समय भी दिया था। बहरहाल, हाल में आपदा प्रबंधन विभाग ने पीडीएनए की रिपोर्ट एनडीएमए को भेज दी है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने रिपोर्ट भेजने की पुष्टि की है।

यह टीम बनाई गई थी
जो टीम बनी थी, उसमें एनडीएमए की ओर से सीबीआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार, सीबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया, आईआईटी रुड़की के प्रो. डॉ. श्रीकृष्णन शिवा, प्रो. गगनदीप सिंह (एनआईडीएम), डॉ. महेश शर्मा (एनआईडीएम), सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. डीपी कानूनगो, अशोक ठाकुर (सीनियर कंसलटेंट, एनडीएमए), डॉ. रूपम शुक्ला (आईआईटी रुड़की), रानू चौहान (सीनियर कंसलटेंट, एनडीएमए) तथा अन्य विशेषज्ञ शामिल थे। प्रदेश की तरफ से टीम में यूएलएमएमसी निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, प्रधान सलाहकार डॉ. मोहित पूनिया और जिले से विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया था।

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