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Delhi NCR News: साइबर ठगी के 34 पीड़ितों को लौटाए गए 3.59 लाख रुपये
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आई4सी के मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल की मदद से धन वापसी, 22 मामलों में दस्तावेज न मिलने से प्रक्रिया अटकी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की ओर से विकसित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के जरिए ऑनलाइन ठगी के 34 पीड़ितों को कुल 3.59 लाख रुपये वापस दिलाए हैं। पुलिस के अनुसार, सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित शिकायतकर्ताओं के खातों में स्थानांतरित की गई।
सेंट्रल रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि आई4सी से कुल 70 एमआरएम अनुरोध प्राप्त हुए थे। इनमें से 34 मामलों में शिकायतकर्ताओं से आवश्यक दस्तावेज हासिल कर उनका सत्यापन किया गया। इसके बाद दस्तावेज एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किए गए और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने पर रोकी गई राशि पीड़ितों को वापस कर दी गई। उन्होंने बताया कि आई4सी से अनुरोध मिलने के बाद पुलिस पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें धन वापसी की पूरी प्रक्रिया समझाती है। शिकायतकर्ताओं को पैन कार्ड की प्रति, पहचान संबंधी दस्तावेज और स्टांप पेपर पर निष्पादित इंडेम्निटी बॉन्ड जमा कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होना होता है।
पुलिस के मुताबिक, 22 मामलों में शिकायतकर्ताओं को बार-बार फोन और संदेश भेजे गए, लेकिन उनके थाने नहीं पहुंचने के कारण धन वापसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। शेष मामलों में कार्रवाई जारी है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि लोगों को समय पर राहत दिलाने व एमआरएम से जुड़े कार्यों की निगरानी के लिए एक समर्पित कर्मचारी नियुक्त किया गया है। यह कर्मचारी शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने, दस्तावेजी प्रक्रिया में सहायता देने, प्रगति की निगरानी करने और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड कराने का कार्य करता है।
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क्या है एमआरएम
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) द्वारा विकसित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) साइबर ठगी के पीड़ितों को 50 हजार रुपये तक की रोकी गई राशि वापस दिलाने की व्यवस्था है। यह प्रणाली पुलिस इकाइयों को पात्र मामलों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण करने में मदद करती है, जिससे बैंकिंग हस्तक्षेप के जरिए सुरक्षित किए गए धन को पीड़ितों तक पहुंचाया जा सके।
धन वापसी के लिए जरूरी दस्तावेज
एमआरएम के तहत अनुरोध आई4सी से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से प्राप्त होते हैं। इसके बाद संबंधित शिकायतकर्ता से संपर्क किया जाता है। प्रक्रिया पूरी करने के लिए 10 रुपये के स्टांप पेपर पर क्षतिपूर्ति बॉन्ड, पैन कार्ड की प्रति, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात जमा कराने होते हैं। सभी दस्तावेजों के सत्यापन और सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के बाद उन्हें एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसके बाद धन वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की ओर से विकसित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) के जरिए ऑनलाइन ठगी के 34 पीड़ितों को कुल 3.59 लाख रुपये वापस दिलाए हैं। पुलिस के अनुसार, सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित शिकायतकर्ताओं के खातों में स्थानांतरित की गई।
सेंट्रल रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि आई4सी से कुल 70 एमआरएम अनुरोध प्राप्त हुए थे। इनमें से 34 मामलों में शिकायतकर्ताओं से आवश्यक दस्तावेज हासिल कर उनका सत्यापन किया गया। इसके बाद दस्तावेज एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किए गए और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने पर रोकी गई राशि पीड़ितों को वापस कर दी गई। उन्होंने बताया कि आई4सी से अनुरोध मिलने के बाद पुलिस पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें धन वापसी की पूरी प्रक्रिया समझाती है। शिकायतकर्ताओं को पैन कार्ड की प्रति, पहचान संबंधी दस्तावेज और स्टांप पेपर पर निष्पादित इंडेम्निटी बॉन्ड जमा कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से थाने में उपस्थित होना होता है।
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पुलिस के मुताबिक, 22 मामलों में शिकायतकर्ताओं को बार-बार फोन और संदेश भेजे गए, लेकिन उनके थाने नहीं पहुंचने के कारण धन वापसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। शेष मामलों में कार्रवाई जारी है। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि लोगों को समय पर राहत दिलाने व एमआरएम से जुड़े कार्यों की निगरानी के लिए एक समर्पित कर्मचारी नियुक्त किया गया है। यह कर्मचारी शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने, दस्तावेजी प्रक्रिया में सहायता देने, प्रगति की निगरानी करने और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड कराने का कार्य करता है।
क्या है एमआरएम
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) द्वारा विकसित मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) साइबर ठगी के पीड़ितों को 50 हजार रुपये तक की रोकी गई राशि वापस दिलाने की व्यवस्था है। यह प्रणाली पुलिस इकाइयों को पात्र मामलों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण करने में मदद करती है, जिससे बैंकिंग हस्तक्षेप के जरिए सुरक्षित किए गए धन को पीड़ितों तक पहुंचाया जा सके।
धन वापसी के लिए जरूरी दस्तावेज
एमआरएम के तहत अनुरोध आई4सी से आधिकारिक ईमेल के माध्यम से प्राप्त होते हैं। इसके बाद संबंधित शिकायतकर्ता से संपर्क किया जाता है। प्रक्रिया पूरी करने के लिए 10 रुपये के स्टांप पेपर पर क्षतिपूर्ति बॉन्ड, पैन कार्ड की प्रति, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात जमा कराने होते हैं। सभी दस्तावेजों के सत्यापन और सक्षम अधिकारियों की मंजूरी के बाद उन्हें एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसके बाद धन वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है।