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Delhi NCR News: आंत के कैंसर को लेकर 80% भारतीय बेखबर, नहीं पहचान पाते शुरुआती लक्षण
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- यह सर्वे मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 14 बड़े भारतीय शहरों में किया गया
- इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में पाचन संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों में गंभीर बीमारियों को लेकर जागरूकता अभी भी कम है। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट में सामने आया है कि दिल्ली के 80 प्रतिशत से अधिक लोग यह नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह सर्वे मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 14 बड़े भारतीय शहरों में किया गया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में साझा किए गए।
हाल ही में यह सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। इसे 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया। ऐसे में दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। सर्वे में दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक पाए गए। करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं। वहीं, 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा 80 फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते और मल त्याग के बाद भी पूरी तरह साफ न होने का अनुभव होता है। जबकि 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। सर्वे में यह भी सामने आया कि 35.5 फीसदी लोग ही नियमित व्यायाम करते हैं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है।
डॉक्टरों ने दी चेतावनी-
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। वहीं डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। वहीं, डॉ. आदित्य सरीन ने बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी बनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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- इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में पाचन संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों में गंभीर बीमारियों को लेकर जागरूकता अभी भी कम है। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट में सामने आया है कि दिल्ली के 80 प्रतिशत से अधिक लोग यह नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह सर्वे मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 14 बड़े भारतीय शहरों में किया गया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में साझा किए गए।
हाल ही में यह सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। इसे 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से किया गया। ऐसे में दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। सर्वे में दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक पाए गए। करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं। वहीं, 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा 80 फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते और मल त्याग के बाद भी पूरी तरह साफ न होने का अनुभव होता है। जबकि 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। सर्वे में यह भी सामने आया कि 35.5 फीसदी लोग ही नियमित व्यायाम करते हैं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है।
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डॉक्टरों ने दी चेतावनी-
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। वहीं डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। वहीं, डॉ. आदित्य सरीन ने बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी बनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।