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Delhi NCR News: डायबिटीज और हाइपरटेंशन के 90 प्रतिशत मरीजों का नहीं हुआ फॉलोअप
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एम्स दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एक अध्ययन में खुलासा- ग्रामीणों में भी बढ़ रहा हाइपरटेंशन और डायबिटीज
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश के ग्रामीण इलाकों में भी अब हाइपरटेंशन और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका बड़ा कारण जागरूकता की कमी और इलाज के बाद सही मार्गदर्शन (काउंसलिंग) का अभाव है। एम्स, नई दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि इन बीमारियों से पीड़ित लगभग 90 प्रतिशत मरीजों का इलाज के बाद दोबारा फॉलोअप नहीं किया गया। साथ ही, उन्हें खानपान विशेषज्ञ या काउंसलर के पास भी नहीं भेजा गया, जबकि इन बीमारियों के नियंत्रण में सही आहार और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है।
यह अध्ययन फरीदाबाद के आसपास के 20 गांवों में रहने वाले 300 मरीजों पर किया गया था। इसमें 30 से 65 वर्ष की उम्र के लोग शामिल थे। इनमें 41 प्रतिशत मरीज हाइपरटेंशन, 35 प्रतिशत डायबिटीज और 24 प्रतिशत दोनों बीमारियों से पीड़ित पाए गए। अध्ययन के अनुसार, 55.7 प्रतिशत मरीज निजी अस्पतालों में और 44.3 प्रतिशत सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। वहीं, 82 प्रतिशत मरीजों को इलाज के विकल्पों की पूरी जानकारी नहीं दी गई, और 79 प्रतिशत को अपने खानपान और व्यायाम के लक्ष्य तय करने के लिए भी प्रेरित नहीं किया गया।
एम्स के प्रोफेसर डॉ. आनंद कृष्णन के अनुसार, ये बीमारियां लंबे समय तक चलती हैं, इसलिए सिर्फ दवा लिख देना काफी नहीं है। मरीजों को लगातार फॉलोअप, रिमाइंडर और जीवनशैली सुधार के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इसके लिए डिजिटल माध्यमों और तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। अध्ययन से साफ है कि अगर सही काउंसलिंग और नियमित निगरानी हो, तो इन बीमारियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। देश के ग्रामीण इलाकों में भी अब हाइपरटेंशन और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका बड़ा कारण जागरूकता की कमी और इलाज के बाद सही मार्गदर्शन (काउंसलिंग) का अभाव है। एम्स, नई दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एक अध्ययन में यह सामने आया है कि इन बीमारियों से पीड़ित लगभग 90 प्रतिशत मरीजों का इलाज के बाद दोबारा फॉलोअप नहीं किया गया। साथ ही, उन्हें खानपान विशेषज्ञ या काउंसलर के पास भी नहीं भेजा गया, जबकि इन बीमारियों के नियंत्रण में सही आहार और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है।
यह अध्ययन फरीदाबाद के आसपास के 20 गांवों में रहने वाले 300 मरीजों पर किया गया था। इसमें 30 से 65 वर्ष की उम्र के लोग शामिल थे। इनमें 41 प्रतिशत मरीज हाइपरटेंशन, 35 प्रतिशत डायबिटीज और 24 प्रतिशत दोनों बीमारियों से पीड़ित पाए गए। अध्ययन के अनुसार, 55.7 प्रतिशत मरीज निजी अस्पतालों में और 44.3 प्रतिशत सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। वहीं, 82 प्रतिशत मरीजों को इलाज के विकल्पों की पूरी जानकारी नहीं दी गई, और 79 प्रतिशत को अपने खानपान और व्यायाम के लक्ष्य तय करने के लिए भी प्रेरित नहीं किया गया।
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एम्स के प्रोफेसर डॉ. आनंद कृष्णन के अनुसार, ये बीमारियां लंबे समय तक चलती हैं, इसलिए सिर्फ दवा लिख देना काफी नहीं है। मरीजों को लगातार फॉलोअप, रिमाइंडर और जीवनशैली सुधार के लिए प्रेरित करना जरूरी है। इसके लिए डिजिटल माध्यमों और तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। अध्ययन से साफ है कि अगर सही काउंसलिंग और नियमित निगरानी हो, तो इन बीमारियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
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