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Delhi NCR News: फिल्मी अंदाज में कारोबारी के घर छापा मारने सीबीआई अधिकारी घर पहुंचा समूह, पहचान पत्र न दिखाने पर नहीं खुला दरवाजा
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रोहिणी में फिल्मी अंदाज में पहुंचा संदिग्धों का समूह, पहचान और दस्तावेज मांगने पर नहीं दिखा सके वैध कागजात
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रोहिणी इलाके में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक कारोबारी के घर छापा मारने की कोशिश का मामला सामने आया है। कारोबारी के घर पहुंचे संदिग्धों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए तलाशी लेने की बात कही। हालांकि, घर में मौजूद महिला की सतर्कता के चलते उनका मंसूबा पूरा नहीं हो सका। महिला ने दरवाजा खोलने से पहले उनसे पहचान पत्र और छापेमारी से संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा, लेकिन वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
शिकायत के अनुसार, संदिग्ध करीब एक घंटे से अधिक समय तक घर के बाहर खड़े रहे। महिला ने जब दरवाजा नहीं खोला तो सभी वहां से चले गए। इसके बाद परिवार ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। कारोबारी का आरोप है कि व्हाट्सएप पर सीबीआई के नाम से एक दस्तावेज भी भेजा था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। घर पहुंचे सभी लोग कोट पहने हुए थे, जिससे परिवार को उनके सीबीआई अधिकारी होने का संदेह हुआ।
प्रशांत विहार थाना पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में पीड़ित कारोबारी प्रथम अग्रवाल के फर्नीचर के कारोबार से जुड़ा एक पुराना विवाद भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी का एक अन्य व्यापारी से लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था और दोनों के बीच करीब तीन करोड़ रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं कारोबारी को डराने, दबाव बनाने या किसी विवाद में फंसाने के लिए फर्जी छापे की साजिश तो नहीं रची गई।
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पुलिस संदिग्धों की पहचान के साथ-साथ उनके घर तक पहुंचने, व्हाट्सएप पर भेजे गए दस्तावेज और कारोबारी के विवाद से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल ने बताया कि छापेमारी की घटना 11 अगस्त की है और पीड़ित कारोेबारी ने 14 अगस्त को पुलिस में शिकायत की है। इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में फर्जी सीबीआई छापेमारी की कोशिश की गई थी या घटना के पीछे कोई अन्य कारण था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रोहिणी इलाके में खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक कारोबारी के घर छापा मारने की कोशिश का मामला सामने आया है। कारोबारी के घर पहुंचे संदिग्धों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए तलाशी लेने की बात कही। हालांकि, घर में मौजूद महिला की सतर्कता के चलते उनका मंसूबा पूरा नहीं हो सका। महिला ने दरवाजा खोलने से पहले उनसे पहचान पत्र और छापेमारी से संबंधित दस्तावेज दिखाने को कहा, लेकिन वह कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
शिकायत के अनुसार, संदिग्ध करीब एक घंटे से अधिक समय तक घर के बाहर खड़े रहे। महिला ने जब दरवाजा नहीं खोला तो सभी वहां से चले गए। इसके बाद परिवार ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। कारोबारी का आरोप है कि व्हाट्सएप पर सीबीआई के नाम से एक दस्तावेज भी भेजा था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। घर पहुंचे सभी लोग कोट पहने हुए थे, जिससे परिवार को उनके सीबीआई अधिकारी होने का संदेह हुआ।
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प्रशांत विहार थाना पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में पीड़ित कारोबारी प्रथम अग्रवाल के फर्नीचर के कारोबार से जुड़ा एक पुराना विवाद भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी का एक अन्य व्यापारी से लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था और दोनों के बीच करीब तीन करोड़ रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं कारोबारी को डराने, दबाव बनाने या किसी विवाद में फंसाने के लिए फर्जी छापे की साजिश तो नहीं रची गई।
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पुलिस संदिग्धों की पहचान के साथ-साथ उनके घर तक पहुंचने, व्हाट्सएप पर भेजे गए दस्तावेज और कारोबारी के विवाद से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल ने बताया कि छापेमारी की घटना 11 अगस्त की है और पीड़ित कारोेबारी ने 14 अगस्त को पुलिस में शिकायत की है। इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में फर्जी सीबीआई छापेमारी की कोशिश की गई थी या घटना के पीछे कोई अन्य कारण था।