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Delhi NCR News: आईजीएनसीए में बंगाल की गंभीरा परंपरा का हनुमान मुखौटा प्रदर्शित किया गया
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नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने मास्क ऑफ द वीक शृंखला के तहत इस सप्ताह पश्चिम बंगाल के मालदा क्षेत्र की प्रसिद्ध गंभीरा मुखौटा परंपरा से जुड़े हनुमान मुखौटे को प्रदर्शित किया। यह मुखौटा भारतीय लोक परंपराओं, भक्ति और शिल्पकला की समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत करता है। आईजीएनसीए के मुखौटा संग्रह में शामिल यह मुखौटा गंभीरा लोकनाट्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लोक कलाकार विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कथाओं के मंचन के दौरान ऐसे मुखौटों का उपयोग करते हैं। हनुमान का यह मुखौटा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बंगाल की लोक कलात्मक अभिव्यक्ति और शिल्प कौशल को भी दर्शाता है। केंद्र की ओर से आगंतुकों को भारतीय मुखौटा निर्माण की विविध परंपराओं को जानने और समझने के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रदर्शनी देखने पहुंचे कला और संस्कृति प्रेमियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां देश की लोक एवं जनजातीय कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं।
आईजीएनसीए के अधिकारियों के अनुसार, ‘मास्क ऑफ द वीक’ श्रृंखला का उद्देश्य भारत की विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं में प्रचलित मुखौटों की कलात्मक, ऐतिहासिक और सामाजिक महत्ता को सामने लाना है। इस पहल के माध्यम से दर्शकों को देश की विविध लोक विरासत से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शित हनुमान मुखौटा आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और पारंपरिक भारतीय मुखौटा कला के प्रति लोगों की उत्सुकता को भी बढ़ा रहा है। संवाद
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लोक कलाकार विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कथाओं के मंचन के दौरान ऐसे मुखौटों का उपयोग करते हैं। हनुमान का यह मुखौटा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बंगाल की लोक कलात्मक अभिव्यक्ति और शिल्प कौशल को भी दर्शाता है। केंद्र की ओर से आगंतुकों को भारतीय मुखौटा निर्माण की विविध परंपराओं को जानने और समझने के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रदर्शनी देखने पहुंचे कला और संस्कृति प्रेमियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां देश की लोक एवं जनजातीय कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं।
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आईजीएनसीए के अधिकारियों के अनुसार, ‘मास्क ऑफ द वीक’ श्रृंखला का उद्देश्य भारत की विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं में प्रचलित मुखौटों की कलात्मक, ऐतिहासिक और सामाजिक महत्ता को सामने लाना है। इस पहल के माध्यम से दर्शकों को देश की विविध लोक विरासत से परिचित होने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शित हनुमान मुखौटा आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और पारंपरिक भारतीय मुखौटा कला के प्रति लोगों की उत्सुकता को भी बढ़ा रहा है। संवाद