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Delhi NCR News: न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर आप ने सवाल उठाए
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केजरीवाल के सत्याग्रह को बताया साहसिक फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने आबकारी मामले में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही कार्यवाही में हिस्सा न लेने के निर्णय को गांधीवादी सत्याग्रह बताते हुए उसका समर्थन किया है। पार्टी नेताओं ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला केवल केजरीवाल का निजी निर्णय नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद टूटने पर लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक है।
सांसद संजय सिंह ने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की आरएसएस के कार्यक्रमों में उपस्थिति और वहां कथित तौर पर पदोन्नति संबंधी उनकी टिप्पणी न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने कहा कि जब कोई न्यायाधीश खुलकर वैचारिक मंचों से जुड़ा दिखे तो उससे निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कमजोर पड़ती है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा आबकारी मामले में कई बार आप नेताओं के खिलाफ फैसला दे चुकी हैं, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पलटा।
प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने इसे बहुत साहसी और ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि किसी राजनेता के न्यायिक प्रक्रिया के भीतर रहते हुए गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह करना असाधारण कदम है, जो लोकतंत्र और न्यायिक जवाबदेही को मजबूत करेगा।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि जब किसी नागरिक को लगे कि उसे न्याय नहीं मिलेगा तो उसके पास सत्य और अहिंसा का मार्ग ही बचता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल अरविंद केजरीवाल का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी न्याय से उम्मीद टूटती है। जबकि मुख्य सचेतक संजीव झा ने कहा कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। वहीं, मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि यदि न्यायाधीश के पारिवारिक हित किसी पक्ष से जुड़े हों, तो निष्पक्षता की धारणा कमजोर होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने आबकारी मामले में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में चल रही कार्यवाही में हिस्सा न लेने के निर्णय को गांधीवादी सत्याग्रह बताते हुए उसका समर्थन किया है। पार्टी नेताओं ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला केवल केजरीवाल का निजी निर्णय नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद टूटने पर लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक है।
सांसद संजय सिंह ने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की आरएसएस के कार्यक्रमों में उपस्थिति और वहां कथित तौर पर पदोन्नति संबंधी उनकी टिप्पणी न्यायिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने कहा कि जब कोई न्यायाधीश खुलकर वैचारिक मंचों से जुड़ा दिखे तो उससे निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कमजोर पड़ती है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा आबकारी मामले में कई बार आप नेताओं के खिलाफ फैसला दे चुकी हैं, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने पलटा।
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प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने इसे बहुत साहसी और ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि किसी राजनेता के न्यायिक प्रक्रिया के भीतर रहते हुए गांधीवादी तरीके से सत्याग्रह करना असाधारण कदम है, जो लोकतंत्र और न्यायिक जवाबदेही को मजबूत करेगा।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि जब किसी नागरिक को लगे कि उसे न्याय नहीं मिलेगा तो उसके पास सत्य और अहिंसा का मार्ग ही बचता है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल अरविंद केजरीवाल का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी न्याय से उम्मीद टूटती है। जबकि मुख्य सचेतक संजीव झा ने कहा कि न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। वहीं, मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि यदि न्यायाधीश के पारिवारिक हित किसी पक्ष से जुड़े हों, तो निष्पक्षता की धारणा कमजोर होती है।

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