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अनिल अंबानी ग्रुप-ईडी विवाद : हाईकोर्ट ने पूछा, मुंबई में क्यों नही दाखिल की याचिका
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी ग्रुप की दो कंपनियों-रिलायंस रियल्टी और कैंपियन प्रॉपर्टीज लिमिटेड-की उस याचिका पर सख्त रुख अपनाया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनकी संपत्तियों के अस्थायी कुर्की के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने पूछा कि यहां क्यों सुनीं जाए? मुंबई में क्यों नहीं दाखिल की गई? क्योंकि कंपनियां मुंबई में स्थित हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से याचिका की पोषणीयता (मेटेनबिलिटी) पर संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा और मामले को 30 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया। ईडी ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों पर बैंक लोन के दुरुपयोग, एवरग्रीनिंग, संबंधित पक्षों को फंड डायवर्शन, शेल कंपनियों के माध्यम से रूटिंग और साइफनिंग का आरोप लगाया है। जांच में पाया कि 2010-12 से रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरसीओएम) समेत ग्रुप कंपनियों ने भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये लिए, जिनमें से 19,694 करोड़ अभी बकाया हैं। इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य लोन चुकाने, संबंधित पक्षों को ट्रांसफर और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किया गया, जो लोन शर्तों का उल्लंघन है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी ग्रुप की दो कंपनियों-रिलायंस रियल्टी और कैंपियन प्रॉपर्टीज लिमिटेड-की उस याचिका पर सख्त रुख अपनाया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनकी संपत्तियों के अस्थायी कुर्की के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने पूछा कि यहां क्यों सुनीं जाए? मुंबई में क्यों नहीं दाखिल की गई? क्योंकि कंपनियां मुंबई में स्थित हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से याचिका की पोषणीयता (मेटेनबिलिटी) पर संक्षिप्त नोट दाखिल करने को कहा और मामले को 30 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया। ईडी ने अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों पर बैंक लोन के दुरुपयोग, एवरग्रीनिंग, संबंधित पक्षों को फंड डायवर्शन, शेल कंपनियों के माध्यम से रूटिंग और साइफनिंग का आरोप लगाया है। जांच में पाया कि 2010-12 से रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरसीओएम) समेत ग्रुप कंपनियों ने भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपये लिए, जिनमें से 19,694 करोड़ अभी बकाया हैं। इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य लोन चुकाने, संबंधित पक्षों को ट्रांसफर और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किया गया, जो लोन शर्तों का उल्लंघन है।
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