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Delhi NCR News: अरविंद केजरीवाल को ईडी की याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दो याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। ये याचिकाएं आबकारी नीति मामले में समन जारी होने के बावजूद पेश न होने के आरोप में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बरी के फैसले को चुनौती देती हैं। न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत में केजरीवाल के वकील ने पेश होकर बताया कि उन्होंने आप नेता की ओर से वकालतनामा दाखिल कर दिया है। वकील ने कहा, हमने आज वकालतनामा दाखिल किया है। हम विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। बरी का आदेश है। अदालत ने कहा कि जवाब चार सप्ताह में दाखिल किया जाए और ईडी की याचिकाओं पर अगली सुनवाई सितंबर में होने की संभावना है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली ईडी की 2024 की याचिका भी सितंबर में सूचीबद्ध की जा सकती है। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि मामला लंबे समय के लिए स्थगित किया जाना चाहिए, क्योंकि केजरीवाल की अंतरिम जमानत का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी और पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और जरूरत से जुड़े तीन सवालों को बड़ी बेंच को भेज दिया था। इससे पहले 20 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने ईडी की याचिका पर स्थगित कर दिया था। समन संबंधी मामलों में ईडी ने ट्रायल कोर्ट में आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए। ट्रायल कोर्ट ने हालांकि कहा था कि ईडी यह साबित नहीं कर सकी कि केजरीवाल ने जानबूझकर अवज्ञा की। अदालत ने ईमेल के जरिए समन की तामील और पीएमएलए की धारा 50(2) के तहत प्रक्रिया को कानून के अनुसार साबित न होने का हवाला दिया।
केजरीवाल फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। शराब नीति मामले में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 अन्य को डिस्चार्ज कर दिया था। सीबीआई की चुनौती हाईकोर्ट में लंबित है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दो याचिकाओं पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। ये याचिकाएं आबकारी नीति मामले में समन जारी होने के बावजूद पेश न होने के आरोप में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बरी के फैसले को चुनौती देती हैं। न्यायमूर्ति मनोज जैन की अदालत में केजरीवाल के वकील ने पेश होकर बताया कि उन्होंने आप नेता की ओर से वकालतनामा दाखिल कर दिया है। वकील ने कहा, हमने आज वकालतनामा दाखिल किया है। हम विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। बरी का आदेश है। अदालत ने कहा कि जवाब चार सप्ताह में दाखिल किया जाए और ईडी की याचिकाओं पर अगली सुनवाई सितंबर में होने की संभावना है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली ईडी की 2024 की याचिका भी सितंबर में सूचीबद्ध की जा सकती है। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि मामला लंबे समय के लिए स्थगित किया जाना चाहिए, क्योंकि केजरीवाल की अंतरिम जमानत का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 जुलाई 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी थी और पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और जरूरत से जुड़े तीन सवालों को बड़ी बेंच को भेज दिया था। इससे पहले 20 जून 2024 को ट्रायल कोर्ट ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने ईडी की याचिका पर स्थगित कर दिया था। समन संबंधी मामलों में ईडी ने ट्रायल कोर्ट में आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए। ट्रायल कोर्ट ने हालांकि कहा था कि ईडी यह साबित नहीं कर सकी कि केजरीवाल ने जानबूझकर अवज्ञा की। अदालत ने ईमेल के जरिए समन की तामील और पीएमएलए की धारा 50(2) के तहत प्रक्रिया को कानून के अनुसार साबित न होने का हवाला दिया।
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केजरीवाल फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। शराब नीति मामले में ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 अन्य को डिस्चार्ज कर दिया था। सीबीआई की चुनौती हाईकोर्ट में लंबित है।
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