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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   As the weather changes, the number of patients with viral fever in hospitals has increased.

Delhi NCR News: मौसम बदलते ही अस्पतालों में वायरल बुखार के बढ़े मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Oct 2026 06:06 PM IST
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-सांस संबंधी बीमारी से जूझने वाले मरीजों का भी फूलने लगा दम
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
दिल्ली में मौसम में हुए बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार के 15 फीसदी तक मरीज बढ़ गए है। खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षणों के साथ मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे है। साथ ही सांस संबंधी बीमारियों से जूझने वाले मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई है।

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. अजय चौहान ने बताया कि बदलते मौसम में वायरल बुखार के मरीज सबसे ज्यादा आते है। मौसम में ठंड की आहट के साथ सांस संबंधी परेशानी से जूझने वाले मरीजों की दिक्कतें भी बढ़ जाती है। खासतौर पर सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के मरीजों को दम फूलने लगता है। ब्रोंकाइटिस की स्थिति में सांस की नली में सूजन होने पर बलगम अधिक आने लगता है।
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सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन से होगा बचाव : जबकि धूल, परागकण, ठंडी हवा से अस्थमा मरीजों की परेशानी बढ़ती है। इस बदलते मौसम में सांस संबंधी परेशानियों से जूझने वाले बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। न्यूमोकोकल वैक्सीन और सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाएं। दोनों ही श्वसन प्रणाली को गंभीर संक्रमणों से बचाने वाले अहम टीके है। दोनों वैक्सीन का उद्देश्य फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (जैसे निमोनिया) और उससे होने वाली जटिलताओं को रोकना है।
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15 फीसदी तक वायरल बुखार के बढ़े मरीज : दिल्ली सरकार के डीडीयू अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी और फेमा संरक्षक डॉ. संदीप डागर ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते वायरल बुखार के ओपीडी में 15 फीसदी तक मरीज बढ़े है। मरीज जुकाम, गले में खराश, नाक बहने, बुखार के लक्षणों के साथ उपचार के लिए अस्पताल में पहुंच रहे है। सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और बुजुर्ग है। इसकी वजह उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का संवेनशील होना है। इसी के साथ एलर्जिक राइनाइटिस के भी मरीज सामने आ रहे है जो आंखों में खुजली, पानी आने की शिकायत को बयां कर रहे है। वायरल बुखार से ठीक होने में मरीजों को चार से पांच दिन का समय लग रहा है।

बीमारी से ऐसे होगा बचाव : उन्होंने कहा कि आगे सर्दी का मौसम बढ़ेगा और आबोहवा भी प्रदूषित होगी तो ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बुजुर्ग लोग सुबह-शाम के समय सैर करने से परहेज करें। चेहरे पर मास्क लगाकर रखें। बच्चे और बुजुर्ग सर्दी के कपड़े पहनें। पोषण युक्त आहार लें। सर्दी के मौसम में लोग पानी पीना कम कर देते है जो कि गलत है। सर्दी में भी पर्याप्त पानी पीयें। धूल वाले स्थानों पर जाने से बचें। बाहर से आकर आंखों को पानी से जरूर धोएं। खांसते और छींकते समय सावधानी रखें। अगर किसी को दिक्कत ज्यादा बनी हुई है तो वह चेहरे पर मास्क लगाकर रखें।

सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन से होगा बचाव : जबकि धूल, परागकण, ठंडी हवा से अस्थमा मरीजों की परेशानी बढ़ती है। इस बदलते मौसम में सांस संबंधी परेशानियों से जूझने वाले बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। न्यूमोकोकल वैक्सीन और सीजनल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाएं। दोनों ही श्वसन प्रणाली को गंभीर संक्रमणों से बचाने वाले अहम टीके है। दोनों वैक्सीन का उद्देश्य फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (जैसे निमोनिया) और उससे होने वाली जटिलताओं को रोकना है।

15 फीसदी तक वायरल बुखार के बढ़े मरीज : दिल्ली सरकार के डीडीयू अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी और फेमा संरक्षक डॉ. संदीप डागर ने बताया कि मौसम में बदलाव के चलते वायरल बुखार के ओपीडी में 15 फीसदी तक मरीज बढ़े है। मरीज जुकाम, गले में खराश, नाक बहने, बुखार के लक्षणों के साथ उपचार के लिए अस्पताल में पहुंच रहे है। सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे और बुजुर्ग है। इसकी वजह उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का संवेनशील होना है। इसी के साथ एलर्जिक राइनाइटिस के भी मरीज सामने आ रहे है जो आंखों में खुजली, पानी आने की शिकायत को बयां कर रहे है। वायरल बुखार से ठीक होने में मरीजों को चार से पांच दिन का समय लग रहा है।


बीमारी से ऐसे होगा बचाव : उन्होंने कहा कि आगे सर्दी का मौसम बढ़ेगा और आबोहवा भी प्रदूषित होगी तो ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बुजुर्ग लोग सुबह-शाम के समय सैर करने से परहेज करें। चेहरे पर मास्क लगाकर रखें। बच्चे और बुजुर्ग सर्दी के कपड़े पहनें। पोषण युक्त आहार लें। सर्दी के मौसम में लोग पानी पीना कम कर देते है जो कि गलत है। सर्दी में भी पर्याप्त पानी पीयें। धूल वाले स्थानों पर जाने से बचें। बाहर से आकर आंखों को पानी से जरूर धोएं। खांसते और छींकते समय सावधानी रखें। अगर किसी को दिक्कत ज्यादा बनी हुई है तो वह चेहरे पर मास्क लगाकर रखें।
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