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Delhi NCR News: फांसी घर मामले में केजरीवाल की गैरहाजिरी पर विधानसभा सख्त
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-विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट मंजूर, अब स्पीकर नियमों के तहत करेंगे आगे की कार्रवाई
-समन के बावजूद पेश नहीं हुए अरविंद केजरीवाल समेत चार नेता, स्पीकर को कार्रवाई का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फांसी घर विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली विधानसभा कड़ी कार्रवाई कर सकती है। विशेषाधिकार समिति के समन के बावजूद केजरीवाल और अन्य संबंधित नेता समिति के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद समिति की रिपोर्ट को शुक्रवार को सदन में पेश कर बहुमत से स्वीकार किया। रिपोर्ट के पारित होने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को नियमों के तहत उचित कार्रवाई शुरू करने का अधिकार मिल गया है।
यह विवाद विधानसभा परिसर में बनाए तथाकथित फांसी घर ढांचे से जुड़ा है। सदन में चर्चा के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि साल 2022-23 के बीच इस ढांचे पर करीब 1.05 करोड़ रुपये सार्वजनिक धन खर्च हुआ। यह ढांचा न केवल अनधिकृत है, बल्कि इसके नाम और उद्देश्य को लेकर सदन को गुमराह भी किया गया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त रिकॉर्ड में विधानसभा परिसर में किसी फांसी घर का कोई उल्लेख नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, संबंधित स्थान का उपयोग पहले टिफिन रूम के रूप में होता था। अगस्त 2025 में यह तथ्य सदन के सामने रखा गया था, जिसके बाद इस मुद्दे पर तीन दिन तक चर्चा हुई।
माना गया सदन और समिति की अवमानना
सदन ने मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजा। समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़ला को नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा और व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा। हालांकि, पर्याप्त अवसर और समय दिए जाने के बावजूद, चारों में से कोई भी समिति के सामने उपस्थित नहीं हुआ। समिति ने इसे जानबूझकर की गई अनुपस्थिति बताया और कहा कि यह सदन और समिति की अवमानना के बराबर है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दिल्ली विधानसभा और इसकी समितियों को लोकसभा के समान अधिकार प्राप्त हैं। सुप्रीम कोर्ट भी विधायी समितियों के समन और साक्ष्य मांगने के अधिकार को मान्यता दे चुका है। अध्यक्ष ने कहा कि कानूनी उपायों का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सदन की कार्यवाही को कमजोर करने के लिए नहीं किया जा सकता।
इसमें आगे क्या हो सकता है
विशेषाधिकार समिति की सिफारिशों को सदन ने स्वीकार कर लिया है। अब स्पीकर को अधिकार मिल गया है कि वे नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करें। विधानसभा ने साफ संकेत दिया है कि सदन की गरिमा और अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होगी।
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-समन के बावजूद पेश नहीं हुए अरविंद केजरीवाल समेत चार नेता, स्पीकर को कार्रवाई का अधिकार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। फांसी घर विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली विधानसभा कड़ी कार्रवाई कर सकती है। विशेषाधिकार समिति के समन के बावजूद केजरीवाल और अन्य संबंधित नेता समिति के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद समिति की रिपोर्ट को शुक्रवार को सदन में पेश कर बहुमत से स्वीकार किया। रिपोर्ट के पारित होने के साथ ही विधानसभा अध्यक्ष को नियमों के तहत उचित कार्रवाई शुरू करने का अधिकार मिल गया है।
यह विवाद विधानसभा परिसर में बनाए तथाकथित फांसी घर ढांचे से जुड़ा है। सदन में चर्चा के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि साल 2022-23 के बीच इस ढांचे पर करीब 1.05 करोड़ रुपये सार्वजनिक धन खर्च हुआ। यह ढांचा न केवल अनधिकृत है, बल्कि इसके नाम और उद्देश्य को लेकर सदन को गुमराह भी किया गया। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन में कहा कि राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त रिकॉर्ड में विधानसभा परिसर में किसी फांसी घर का कोई उल्लेख नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, संबंधित स्थान का उपयोग पहले टिफिन रूम के रूप में होता था। अगस्त 2025 में यह तथ्य सदन के सामने रखा गया था, जिसके बाद इस मुद्दे पर तीन दिन तक चर्चा हुई।
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माना गया सदन और समिति की अवमानना
सदन ने मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजा। समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़ला को नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा और व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा। हालांकि, पर्याप्त अवसर और समय दिए जाने के बावजूद, चारों में से कोई भी समिति के सामने उपस्थित नहीं हुआ। समिति ने इसे जानबूझकर की गई अनुपस्थिति बताया और कहा कि यह सदन और समिति की अवमानना के बराबर है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दिल्ली विधानसभा और इसकी समितियों को लोकसभा के समान अधिकार प्राप्त हैं। सुप्रीम कोर्ट भी विधायी समितियों के समन और साक्ष्य मांगने के अधिकार को मान्यता दे चुका है। अध्यक्ष ने कहा कि कानूनी उपायों का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सदन की कार्यवाही को कमजोर करने के लिए नहीं किया जा सकता।
इसमें आगे क्या हो सकता है
विशेषाधिकार समिति की सिफारिशों को सदन ने स्वीकार कर लिया है। अब स्पीकर को अधिकार मिल गया है कि वे नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करें। विधानसभा ने साफ संकेत दिया है कि सदन की गरिमा और अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होगी।