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BMW Accident Case: समय पर इलाज मिलता तो बचाई जा सकती थी वित्त मंत्रालय के अधिकारी की जान, आरोप पत्र दाखिल
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 02 Jan 2026 03:38 AM IST
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सार
पुलिस ने कहा कि नवजोत सिंह हादसे के बाद कम से कम 15 मिनट तक जीवित थे। समय पर मेडिकल मदद मिलती तो उन्हें बचाया जा सकता था।
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विस्तार
बीएमडब्ल्यू से कुचले गए 52 वर्षीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी नवजोत सिंह के मामले में दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट की मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया है। पुलिस ने कहा कि नवजोत सिंह हादसे के बाद कम से कम 15 मिनट तक जीवित थे। समय पर मेडिकल मदद मिलती तो उन्हें बचाया जा सकता था।
14 सितंबर, 2025 को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई। उनकी पत्नी समेत तीन लोग घायल हो गए थे। रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक बीएमडब्ल्यू ने कथित तौर पर उनकी बाइक में टक्कर मार दी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग के सामने दायर की गई 400 पन्नों के आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ ने जानबूझकर पीड़ित को जरूरी मेडिकल मदद देने में देरी की। आरोप पत्र के अनुसार, न्यूलाइफ अस्पताल को एक छोटा दो-मंजिला नर्सिंग होम बताया गया है जिसमें सीमित सुविधाएं हैं। आरोप लगाया गया कि देरी के कारण ट्रॉमा केयर का गोल्डन आवर बर्बाद हो गया।
पुलिस ने पहले दावा किया था कि हादसे के कुछ मिनट बाद ड्राइवर, पैरामेडिक संग 1 एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन आरोपी ने मदद लेने से इन्कार कर दिया। फाइनल रिपोर्ट में आरोपी के न्यूलाइफ अस्पताल से दूर के पारिवारिक रिश्ते का भी जिक्र है।
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14 सितंबर, 2025 को वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई। उनकी पत्नी समेत तीन लोग घायल हो गए थे। रिंग रोड पर दिल्ली कैंटोनमेंट मेट्रो स्टेशन के पास एक बीएमडब्ल्यू ने कथित तौर पर उनकी बाइक में टक्कर मार दी।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकित गर्ग के सामने दायर की गई 400 पन्नों के आरोप पत्र में पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी गगनप्रीत मक्कड़ ने जानबूझकर पीड़ित को जरूरी मेडिकल मदद देने में देरी की। आरोप पत्र के अनुसार, न्यूलाइफ अस्पताल को एक छोटा दो-मंजिला नर्सिंग होम बताया गया है जिसमें सीमित सुविधाएं हैं। आरोप लगाया गया कि देरी के कारण ट्रॉमा केयर का गोल्डन आवर बर्बाद हो गया।
पुलिस ने पहले दावा किया था कि हादसे के कुछ मिनट बाद ड्राइवर, पैरामेडिक संग 1 एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन आरोपी ने मदद लेने से इन्कार कर दिया। फाइनल रिपोर्ट में आरोपी के न्यूलाइफ अस्पताल से दूर के पारिवारिक रिश्ते का भी जिक्र है।