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वांगचुक को हर संभव मेडिकल मदद दे केंद्र : हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य की दैनिक निगरानी के दिए निर्देश, सरकार ने भी हरसंभव इलाज का दिया आश्वासन,
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और चिकित्सा स्थिति की दैनिक निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए सभी संभव चिकित्सा प्रयास किए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकारी अधिकारियों को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की सरकारी डॉक्टरों द्वारा दैनिक निगरानी की जाएगी। डॉक्टरों की राय के आधार पर, उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के लिए जो भी चिकित्सा हस्तक्षेप जरूरी होगी, की जाएगी। इस पर अदालत ने कहा कि हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि वांगचुक की चिकित्सा स्थिति की दैनिक आधार पर निगरानी की जाए।
28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
सोनम वांगचुक बीती 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। लेकिन इस बीच उनका स्वास्थ्य तेजी से गिरता जा रहा है। स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का वजन 8.5 किलो कम हो गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर वे भूख हड़ताल जारी रखते हैं तो उनकी जान जा सकती है।
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सरकार वांगचुक को आतंकवादी समझ रही : याचिका
अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार वांगचुक के साथ किसी कठोर अपराधी, आतंकवादी या देशद्रोही जैसा व्यवहार कर रही है और उनके प्रति बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। याचिका में कहा गया कि सरकार कम से कम उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकती है, भले ही जबरन उन्हें अस्पताल ले जाकर आवश्यक पोषण दिया जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और चिकित्सा स्थिति की दैनिक निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए सभी संभव चिकित्सा प्रयास किए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकारी अधिकारियों को इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की सरकारी डॉक्टरों द्वारा दैनिक निगरानी की जाएगी। डॉक्टरों की राय के आधार पर, उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के लिए जो भी चिकित्सा हस्तक्षेप जरूरी होगी, की जाएगी। इस पर अदालत ने कहा कि हम सॉलिसिटर जनरल के रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि वांगचुक की चिकित्सा स्थिति की दैनिक आधार पर निगरानी की जाए।
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28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
सोनम वांगचुक बीती 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। लेकिन इस बीच उनका स्वास्थ्य तेजी से गिरता जा रहा है। स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का वजन 8.5 किलो कम हो गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर वे भूख हड़ताल जारी रखते हैं तो उनकी जान जा सकती है।
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सरकार वांगचुक को आतंकवादी समझ रही : याचिका
अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार वांगचुक के साथ किसी कठोर अपराधी, आतंकवादी या देशद्रोही जैसा व्यवहार कर रही है और उनके प्रति बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। याचिका में कहा गया कि सरकार कम से कम उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकती है, भले ही जबरन उन्हें अस्पताल ले जाकर आवश्यक पोषण दिया जाए।