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LPG Crisis: गहराते एलपीजी संकट से धुएं में घुटती रोजी-रोटी, झुग्गी वाले ज्यादा परेशान; सरकार का दावा- सब ठीक

सनी सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 05 Apr 2026 02:18 AM IST
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सार

दिल्ली में एलपीजी की कमी को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि राजधानी में गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

Deepening LPG crisis stifles livelihoods in a cloud of smoke
LPG Gas - फोटो : ANI
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विस्तार

दिल्ली में गहराते गैस संकट ने अब छोटे ढाबों और रेहड़ी-पटरी पर खाना बेचने वालों की रोजी-रोटी पर सीधा असर डाला है। पहले जहां एलपीजी सिलेंडर की नीली लौ पर दाल-रोटी पकती थी, वहां लकड़ी और कोयले के चूल्हे जल रहे हैं। धुएं के बीच खाना बनाना मजबूरी बन गया है और बढ़ती लागत ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है।

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आउटर रिंग रोड सीमापुरी में सड़क किनारे ढाबा चलाने वाले बृजेश ने बताया कि पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा है। एजेंसी जाने पर स्टॉक खत्म होने की बात कही जाती है। मजबूरी में लकड़ी का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। पहले एक सिलेंडर से कई दिन काम चलता था लेकिन अब रोज लकड़ी खरीदनी पड़ती है जिससे खर्च बढ़ा और मुनाफा घटा है।

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भजनपुरा में ठेला लगाकर खाना बेचने वाले सोनू ने कहा कि बाजार में गैस ब्लैक में मिल रही है जिसकी कीमत 3000 से ज्यादा है। जो छोटे दुकानदारों के लिए बहुत महंगा है। सिलेंडर खरीदने पर खाने का रेट बढ़ाना पड़ेगा, जो हर कोई ग्राहक नहीं दे पाएगा। ऐसे में लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। धुएं में काम करने से आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी होती है।

सीलमपुर के ढाबा संचालक मो. रसीद का कहना है कि गैस कमी का असर ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ा है। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनने में समय ज्यादा लगता है, ग्राहक इंतजार नहीं कर पाते और दूसरे जगहों पर चले जाते हैं। अब
आधी कमाई भी मुश्किल हो गई है।

करावल नगर में चाय और पराठा बेचने वाले आलोक तिवारी बताते हैं कि गैस संकट ने छोटे ढाबों को पुराने दौर में धकेल दिया है। लकड़ी के चूल्हे पर काम करना मुश्किल है, साथ ही धुएं और गर्मी के कारण स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। अगर जल्द गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो छोटे ढाबे बंद हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस संकट का ज्यादा असर गरीब और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। बड़े होटल और रेस्टोरेंट किसी तरह सिलेंडर का इंतजाम कर लेते हैं लेकिन छोटे ढाबे वालों के पास सीमित संसाधन हैं। ऐसे में प्रशासन और आपूर्ति विभाग से गैस की नियमित आपूर्ति करने की मांग तेज हो गई है।


छोटे सिलिंडर की कमी, दिहाड़ी मजदूरों की रसोई पर पड़ रहा असर
राजधानी में एलपीजी की आपूर्ति में कमी ने दिहाड़ी मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। गैस एजेंसियों पर बड़े सिलिंडरों के लिए लंबी कतारें लगी हैं, वहीं छोटे सिलिंडर भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में छोटे सिलिंडरों पर निर्भर मजदूरों को गैस के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई इलाकों में गैस भरने वाली दुकानें बंद पड़ी हैं और जहां पहले भीड़ रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

छोटे सिलिंडर की किल्लत से परेशानी
बड़े सिलिंडरों के साथ साथ छोटे सिलिंडरों की कमी भी लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। कम खपत वाले परिवारों और छोटे कारोबारियों को खासतौर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई एजेंसियों पर छोटे सिलिंडर या तो उपलब्ध नहीं हैं या बेहद सीमित संख्या में मिल रहे हैं, जो जल्दी खत्म हो जाते हैं। ठेला चालकों, छोटे दुकानदारों और किराए पर रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि वह बड़े सिलिंडर का खर्च नहीं उठा सकते। मजबूरी में उन्हें महंगे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।

दिहाड़ी पर टिकी जिंदगी
आरके पुरम स्थित एकता विहार की झुग्गियों में रहने वाले अधिकांश लोग रोज कमाने और खाने वाले हैं। कोई मजदूरी करता है, कोई रिक्शा चलाता है, तो कोई घरेलू काम करता है। सीमित आमदनी और अनिश्चित खर्च के बीच बड़े गैस सिलिंडर खरीदना इनके लिए संभव नहीं है। छोटे सिलिंडर ही इनके लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प थे, जिन्हें ये अपनी जरूरत के अनुसार भरवाकर उपयोग करते थे। लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

परिवारों के सामने खाने का संकट
मुनिरका की झुग्गी में रहने वाली ओमवती बताती हैं कि पहले वह हफ्ते में एक बार गैस भरवाकर काम चला लेती थीं, लेकिन अब कई दिनों से गैस नहीं मिल रही है। घर में छोटे बच्चे हैं और पति की सीमित आय के कारण खाना बनाना चुनौती बन गया है। वहीं, बाहर से काम करने आए मजदूर सुखदेव का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें होटलों या ढाबों पर जाकर महंगा खाना खाना पड़ रहा है।

कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ी मार
गैस की कमी के साथ साथ बढ़ती कीमतों ने भी गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मजदूरों का कहना है कि पहले जितने पैसे में कई दिनों तक गैस चल जाती थी, अब उतने में मुश्किल से कुछ दिन ही काम चलता है। आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों ने गैस का उपयोग कम कर दिया है। कुछ घरों में दिन में केवल एक बार ही खाना बन रहा है, जबकि कई लोग अब लकड़ी और कोयले का सहारा लेने लगे हैं। सादिक नगर की झुग्गियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उनकी समस्याएं अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं। उनके लिए गैस की यह कमी सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन का गंभीर संकट बन चुकी है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

दिल्ली में एलपीजी की कमी नहीं, आपूर्ति हुई सामान्य : रेखा गुप्ता
दिल्ली में एलपीजी की कमी को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि राजधानी में गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। तीन अप्रैल को दिल्ली में कुल 1,11,504 एलपीजी बुकिंग हुईं, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मिलकर 1,26,379 सिलिंडरों की डिलीवरी की। यानी जितनी बुकिंग हुई, उससे ज्यादा सप्लाई की गई।

सीएम ने यह भी बताया कि अभी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की औसत डिलीवरी समय घटकर 4.37 दिन रह गया है। इससे लोगों को समय पर सिलेंडर मिल रहा है और कोई बड़ी परेशानी नहीं है। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके लिए एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां लोग शिकायत कर सकते हैं। सरकार को मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर 22 छापेमारी की। इस दौरान रोहिणी के नॉर्थ रोहिणी थाना इलाके में एक मामला दर्ज किया गया, जहां 6 एलपीजी सिलेंडर अवैध रूप से जमा पाए गए।

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