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Delhi: देश की राजधानी में एक सपना है साफ पानी, घरों में आ रहा 'धीमा जहर'... पीना मजबूरी; व्यवस्था बर्बाद
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 10 Jan 2026 02:20 AM IST
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सार
स्थानीय लोगों के मुताबिक इन इलाकों में बिछी पानी की पाइपलाइन कई साल पुरानी है। समय के साथ ये पाइपें जर्जर हो चुकी हैं।
नलों से आ रहा गंदा और बदबूदार पानी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के मयूर विहार फेज-2, प्रेम नगर, बलजीत नगर, पटेल नगर और सदर बाजार जैसे इलाकों में लोगों के घरों तक पहुंच रहा पानी गंदा, बदबूदार और खतरनाक हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि साफ पानी अब जरूरत नहीं, बल्कि एक सपना बन चुका है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इन इलाकों में बिछी पानी की पाइपलाइन कई साल पुरानी है। समय के साथ ये पाइपें जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह से टूट चुकी इन लाइनों में लीकेज है, जिससे आसपास के नालों का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है। नतीजा यह है कि घरों के नलों से पीले, काले और बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है।
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राजधानी के नलों में बह रहा गंदा पानी
मयूर विहार फेज-2, प्रेम नगर, बलजीत नगर, पटेल नगर और सदर बाजार जैसे इलाकों में नलों से गंदा पानी बह रहा है। प्रेम नगर और बलजीत नगर में हालात और भी खराब हैं। यहां नालियां अक्सर ओवरफ्लो रहती हैं। ऐसे में लीकेज वाली पाइपों के जरिए गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में चला जाता है। प्रेम नगर निवासी मीना ने बताया कि पानी इतना गंदा है कि पीया तक नहीं जाता। अब करें तो क्या करें। बाहर से बाहर से पानी खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है। पटेल नगर और सदर बाजार में भी समस्या गंभीर है।
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यहां दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी दूषित पानी से नुकसान उठाना पड़ रहा है। चाय, खाना और अन्य कामों में इसी पानी का इस्तेमाल करना मजबूरी बन चुका है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक पाइपलाइन को बदले बिना समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है। आधी-अधूरी मरम्मत से हालात और बिगड़ जाते हैं। कई जगहों पर पाइप पर बस कपड़ा बांधकर या अस्थायी पैच लगाकर काम चला जा रहा है, जो कुछ ही दिनों में फिर से जवाब दे देता है।
मयूर विहार फेज-2 पॉकेट एफ के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष अमित गुप्ता ने बताया कि गंदा पानी पीने के कारण इलाके में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और त्वचा रोग के मामले तेजी से बढ़े हैं। जब हम नल खोलते हैं तो पहले बदबू आती है। कई बार तो पानी देखने में ही इतना गंदा होता है कि डर लगता है। बच्चों को पिलाने से पहले दस बार सोचना पड़ता है। दिल्ली जैसे शहर में, जहां विकास की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, वहां लोगों का गंदा पानी पीने को मजबूर होना सिस्टम पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर समय रहते पाइपलाइन नहीं बदली गई और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।
डॉक्टर बोले, गंदा पानी किस हद तक है खतरनाक
विशेषज्ञों ने बताया कि पीला, काला और बदबूदार पानी सीधे तौर पर सीवर मिलावट का संकेत होता है, जो गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। अगर पानी में बदबू है और रंग बदला हुआ है, तो उसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी होने की पूरी संभावना है। ऐसा पानी पीने से डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, उल्टी-दस्त और पेट के संक्रमण तेजी से फैलते हैं।
वहीं बाल रोग, त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि गंदे पानी पीने से बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है। गंदा पानी बच्चों में डिहाइड्रेशन, आंतों में संक्रमण, वजन कम होना और बार-बार बीमार पड़ने का कारण बन सकता है। लंबे समय तक ऐसा पानी बच्चों के विकास पर भी असर डाल सकता है। इस तरह के पानी से नहाने पर त्वचा पर रैशेज, फंगल इंफेक्शन, खुजली और आंखों में जलन की शिकायत बढ़ जाती हैं। खासकर बुजुर्गों और महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।