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Delhi High Court: 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नाइट कर्फ्यू की मांग, पांच अगस्त को सुनवाई
Thu, 30 Jul 2026 07:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 30 Jul 2026 07:19 AM IST
सार
याचिका में कहा गया है कि बच्चों में सोशल मीडिया की लत और अनुचित सामग्री का संपर्क उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में मांग की गई है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नाइट कर्फ्यू जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया जाए।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पेश हुई, जिसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच प्रतिबंधित करने के लिए देशव्यापी कानूनी ढांचा बनाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि बच्चों में सोशल मीडिया की लत और अनुचित सामग्री का संपर्क उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में मांग की गई है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नाइट कर्फ्यू जैसी सुविधाओं पर भी विचार किया जाए।
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मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष यह मामला पेश हुआ। न्यायमूर्ति करिया ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को ऐसी खंडपीठ के समक्ष होगी, जिसमें न्यायमूर्ति करिया शामिल नहीं होंगे।
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तीन साल की बच्ची की मां व बाल रोग विशेषज्ञ की याचिका
याचिका तीन साल की बच्ची की मां कीर्ति दुआ और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने दायर की है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अलावा मेटा, अल्फाबेट (गूगल-यूट्यूब), टेलीग्राम, स्नैप (स्नैपचैट) और एक्स (ट्विटर) को पक्षकार बनाया गया है।
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दावा- मौजूदा उपाय स्वैच्छिक, बाध्यकारी कानून जरूरी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर अश्लील और अनुचित सामग्री बच्चों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन करती है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 39(एफ) के तहत बच्चों को शोषण से बचाने का राज्य का कर्तव्य भी पूरा नहीं हो रहा। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए कहा गया है कि युवाओं में डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन मौजूदा उपाय स्वैच्छिक हैं। बाध्यकारी कानून की जरूरत है।
- याचिका में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध, 13 से 16 साल के बच्चों के लिए सामग्री नियमन, किशोरों के लिए रात्रि कर्फ्यू, डिजियात्रा की तर्ज पर अनिवार्य आयु सत्यापन प्रणाली और आईटी अधिनियम, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट व पॉक्सो अधिनियम के सख्त प्रवर्तन की मांग की गई है। साथ ही प्लेटफॉर्म्स को बाल यौन शोषण सामग्री वाले यूआरएल ब्लॉक करने और सामग्री फिल्टर करने के निर्देश देने को भी कहा गया है।