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'दिल्ली में कुत्तों की नसबंदी': HC का निर्देश, पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हो शुरू; पक्षियों को लेकर पूछा सवाल

Mon, 03 Aug 2026 06:18 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 03 Aug 2026 06:18 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और एनडीएमसी को हर वार्ड में लावारिस कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने को कहा है।

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Delhi High Court directed MCD-NDMC special camps in every ward for vaccination and sterilization stray dogs
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) को राजधानी के हर वार्ड में लावारिस कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने लावारिस कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े स्वत: संज्ञान जनहित याचिका मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

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एमसीडी को हाईकोर्ट से फटकार
अदालत ने कहा कि एमसीडी और एनडीएमसी अपने-अपने क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में शिविर लगाएं। इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए। शिविर शुरू होने से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और प्रमुख स्थानों पर प्लेकार्ड लगाए जाएं। इनमें स्पष्ट लिखा हो कि लावारिस कुत्तों को पकड़ा नहीं जा रहा है और न ही उन्हें डॉग पाउंड (सुरक्षित, मानवीय और सम्मानजनक वातावरण में संरक्षण देने वाला स्थल) भेजा जाएगा। उन्हें केवल टीकाकरण और नसबंदी के लिए शिविर में लाया जाएगा।

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अदालत का सुझाव : ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों से की जाए शुरुआत
अदालत ने एमसीडी को सुझाव दिया कि वह उन क्षेत्रों से शुरुआत करे जहां लोगों की आवाजाही अधिक है। खंडपीठ ने कहा, छोटे क्षेत्र से शुरू करें। कनॉट प्लेस, इंडिया गेट जैसे वार्ड चुनें, जहां ज्यादा ऑफिस हैं। उस वार्ड में सभी कुत्तों की नसबंदी करवाएं। न्यायमूर्ति मेहता ने निजी अनुभव का किया जिक्र, कहा-मेरी मां को तीन बार कुत्तों ने काटा।

डॉग बाइट की घटनाओं पर हाईकोर्ट चिंतित
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, हम डॉग बाइट का ध्यान रख रहे हैं। हां, वे सबके लिए खतरा हैं। कुत्ते ने मेरी मां को तीन बार काटा है...। कुत्ते काटते हैं...। भगवान करे किसी को न काटें...। रोज कुत्ते काटने की खबरें आती हैं...। मैं इसमें नहीं जाना चाहता कि कुत्ता काटता है या नहीं काटता...। 

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अगली पीढ़ी के लिए भी कुत्तों को बचाना जरूरी
अदालत ने हालांकि यह भी कहा कि वह कहीं भी डॉग बाइट की घटनाएं नहीं चाहती, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुत्तों को बचाना चाहती है। खंडपीठ ने कहा, हम किसी भी कुत्ते की मौत नहीं चाहते आज से हम नहीं सुनना चाहते कि कुत्ता काटा या नहीं काटा, सबको पता है कि काटता है। जब कुत्ते खत्म होंगे तो मैं रोऊंगा। मैं अभी भी कहता हूं कि 5 प्रतिशत आबादी छोड़ दी जाए, ताकि अगली पीढ़ी कुत्ते को देख सके।

पक्षियों की कमी पर हाईकोर्ट ने पूछा सवाल
अदालत ने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पक्षियों की घटती आबादी की ओर भी इशारा किया। खंडपीठ ने कहा, “गौरैया कहां गईं? पूरी दुनिया कुत्तों के पीछे पड़ी है। गौरैया कहां हैं? कौए कहां हैं?” मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

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