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दिल्ली हाईकोर्ट: पीएम आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियां होंगी खाली, छह सप्ताह की मोहलत; अब कहां बसेंगे ये लोग?

Tue, 25 Aug 2026 09:38 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Tue, 25 Aug 2026 09:38 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को घर खाली कर सावदा घेवरा में आवंटित आवास में जाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने पुनर्वास की निगरानी के लिए छह महीने की अवधि वाली समिति भी गठित की है।

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Delhi high court gives six weeks to residents of slums near PM residence to move to Savda Ghevra in delhi
झुग्गियों पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को घर खाली करने और सावदा घेवरा में आवंटित वैकल्पिक आवास में स्थानांतरित होने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा कि पुनर्वास इस तरह होना चाहिए, जिससे लोगों के गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार की रक्षा हो।
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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी के निवासियों के पुनर्वास की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन किया है। इसमें केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, डूसिब, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड, शिक्षा निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
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 सावदा घेवरा में मिलेगा वैकल्पिक आवास
अदालत ने कहा कि तीनों झुग्गी बस्तियों का पुनर्वास 'सार्थक' होना चाहिए और निवासियों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पीठ ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता बीआर कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कॉलोनी स्थित अपने आवास छह सप्ताह के भीतर खाली करेंगे। इसी अवधि में उन्हें सावदा घेवरा स्थित डूसिब कॉलोनी में आवंटित आवास में बसाया जाएगा। इसके बाद भूमि खाली कराने के लिए जरूरत पड़ने पर पुलिस की सहायता से उन्हें वहां से हटाया जाएगा।

अदालत ने भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडओ) को निगरानी समिति के गठन के लिए तत्काल अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश झुग्गी बस्तियों के निवासियों की ओर से दायर अपीलों पर दिया गया, जिनमें एकल न्यायाधीश के 11 मई के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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कोर्ट ने बेदखली को नीति का उल्लंघन मानने से किया इनकार
केंद्र ने बेदखली के पक्ष में दलील देते हुए कहा था कि ये झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां संरक्षित क्षेत्र में हैं और इनके ठीक बगल में वायुसेना का एक परिचालन स्टेशन है। अनधिकृत निर्माण हटाने का फैसला रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं सुरक्षा उद्देश्यों के लिए लिया गया है।

खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं के उस दावे को खारिज कर दिया कि बेदखली की प्रक्रिया दिल्ली स्लम एवं जेजे पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति, 2015 का उल्लंघन है। हालांकि, अदालत ने संबंधित अधिकारियों को सावदा घेवरा में निवासियों को स्कूल, बिजली, एलपीजी कनेक्शन, बस पास और डिस्पेंसरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अपने आश्वासनों और 4 जून के अदालत के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा।
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छह महीने तक पुनर्वास की निगरानी करेगी समिति
अदालत ने कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया की लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि स्थानांतरण के बाद निवासी सार्थक जीवन जी सकें। निगरानी समिति का कार्यकाल छह महीने होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर दो महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है। समिति नियमित बैठक कर पुनर्वास की निगरानी करेगी।

दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी मनमोहन शर्मा को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अदालत ने डूसिब को निवासियों के घरेलू सामान और अन्य वस्तुओं को उनके आवंटित आवास तक पहुंचाने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया है।

11 मई को मिला था 15 दिन का समय
इससे पहले 11 मई को एकल न्यायाधीश ने तीनों झुग्गी बस्तियों के निवासियों को घर खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। अदालत ने कहा था कि एलएंडओ की ओर से उन्हें पहली बार अक्टूबर 2025 में बेदखली के नोटिस दिए गए थे और तब से पर्याप्त समय बीत चुका है।

केंद्र ने उस समय कहा था कि आसपास वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं होने के कारण मौजूदा स्थान पर पुनर्वास संभव नहीं है। इसके चलते तीनों झुग्गी बस्तियों के 717 निवासियों को सावदा घेवरा स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया था।
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