{"_id":"6a6a611a5bed268143029440","slug":"delhi-jal-board-cracks-down-on-illegal-connections-kyc-to-be-conducted-for-30-lakh-unregistered-consumers-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Campaign: अवैध कनेक्शनों पर दिल्ली जल बोर्ड अपनाएगा सख्त रुख, 30 लाख अपंजीकृत उपभोक्ताओं की होगी केवाईसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Campaign: अवैध कनेक्शनों पर दिल्ली जल बोर्ड अपनाएगा सख्त रुख, 30 लाख अपंजीकृत उपभोक्ताओं की होगी केवाईसी
Thu, 30 Jul 2026 01:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:53 AM IST
सार
जल बोर्ड की 179वीं बैठक में राजधानी के करीब 30 लाख अपंजीकृत जल उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी के जरिए सत्यापन कराने का फैसला लिया गया है।
विज्ञापन
दिल्ली जल बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली में अवैध जल कनेक्शनों, गलत बिलिंग और फर्जी उपभोक्ता रिकॉर्ड पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। जल बोर्ड की 179वीं बैठक में राजधानी के करीब 30 लाख अपंजीकृत जल उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी के जरिए सत्यापन कराने का फैसला लिया गया है। अभियान के तहत तीन बाहरी एजेंसियां छह महीने तक घर-घर जाकर उपभोक्ताओं का सत्यापन, मीटर रीडिंग और बिल वितरण करेंगी। इसके साथ ही जल बोर्ड ने यमुना पुनर्जीवन के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है।
विज्ञापन
बुधवार को दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि दिल्ली में लगभग 30 लाख पंजीकृत जल उपभोक्ता हैं, जबकि बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 60 लाख से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में लोग नियमित जल बिलिंग व्यवस्था से बाहर हैं। इन्हें ई-केवाईसी के माध्यम से जल बोर्ड के वैध उपभोक्ता नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी से जल बोर्ड का पूरा डाटाबेस अपडेट होगा। कागजी रिकॉर्ड में दर्ज फर्जी या पुराने नाम हटाकर वास्तविक मकान मालिकों अथवा किरायेदारों का विवरण दर्ज किया जाएगा। अभियान के दौरान प्रत्येक संपत्ति की जियो-टैगिंग भी होगी, जिससे मीटर रीडिंग में पारदर्शिता आएगी। कर्मचारी मौके पर जाकर स्मार्टफोन से जीपीएस आधारित मीटर रीडिंग दर्ज करेंगे, जिससे घर बैठे फर्जी रीडिंग और गलत बिल बनने की शिकायतों पर रोक लगेगी।
विज्ञापन
जल मंत्री ने कहा कि जल आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के साथ-साथ सरकार यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में भी बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से दिल्ली जल बोर्ड ने लगभग 4,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी), सीवर नेटवर्क का विस्तार, मौजूदा एसटीपी का उन्नयन, स्लज प्रबंधन सुविधाओं का विकास और ड्रेनों का इन-सीटू ट्रीटमेंट शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि दिल्ली की अनेक कॉलोनियों और गांवों में आज भी सीवर नेटवर्क नहीं है या अधूरा है। ऐसे क्षेत्रों का बिना उपचारित सीवेज सीधे नालों के माध्यम से यमुना में पहुंचता है। जब तक राजधानी में निकलने वाली प्रत्येक बूंद सीवेज का उपचार नहीं होगा, तब तक यमुना को पूरी तरह स्वच्छ नहीं बनाया जा सकेगा।मंत्री के अनुसार वर्तमान में दिल्ली में प्रतिदिन करीब 1,000 एमजीडी सीवेज उत्पन्न होता है। सरकार के कार्यभार संभालने के समय शोधन क्षमता 749 एमजीडी थी, जिसे मौजूदा एसटीपी के उन्नयन से बढ़ाकर 814 एमजीडी किया जा चुका है। स्वीकृत सभी परियोजनाएं पूरी होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 1,041 एमजीडी हो जाएगी, जिससे लगभग पूरे सीवेज का उपचार संभव होगा।
यमुना पुनर्जीवन के लिए ये काम होंगे
दिल्ली जल बोर्ड ने यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए करीब 4,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 15 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी), सीवर नेटवर्क का विस्तार, मौजूदा एसटीपी का आधुनिकीकरण, स्लज प्रबंधन सुविधाएं और ड्रेनों के इन-सीटू ट्रीटमेंट जैसी योजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य बिना उपचारित सीवेज को यमुना में जाने से रोकना है। जल बोर्ड पहले से स्वीकृत 13 और नए 15 डीएसटीपी सहित कुल 28 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर कार्य करेगा। सरकार का लक्ष्य राजधानी में उत्पन्न होने वाले पूरे सीवेज का उपचार सुनिश्चित कर यमुना में प्रदूषण का प्रवाह रोकना है।
749 एमजीडी से बढ़कर 1,041 एमजीडी होगी शोधन क्षमता
मंत्री ने कहा कि सरकार के कार्यभार संभालने के समय शोधन क्षमता 749 एमजीडी थी, जिसे बढ़ाकर 814 एमजीडी किया जा चुका है। सभी 28 डीएसटीपी पूरे होने के बाद यह क्षमता 1,041 एमजीडी तक पहुंच जाएगी।
2,000 करोड़ में 15 नए डीएसटीपी
करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत से 15 नए डीएसटीपी स्थापित किए जाएंगे। इनकी कुल शोधन क्षमता 103.5 एमजीडी होगी और लगभग 20 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। सभी परियोजनाएं 21 महीने में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
1,600 करोड़ से 989 किमी नया सीवर नेटवर्क
15 नए डीएसटीपी के साथ 1,600 करोड़ रुपये की लागत से 989 किलोमीटर नया सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा। इससे 244 कॉलोनियों और 57 गांवों के घर सीवर नेटवर्क से जुड़ेंगे तथा बिना उपचारित सीवेज के यमुना में जाने पर प्रभावी रोक लगेगी।
एसटीपी क्षमता विस्तार और स्लज प्रबंधन को मंजूरी
मौजूदा एसटीपी की क्षमता 66 एमजीडी से बढ़ाकर 86.8 एमजीडी की जाएगी। इसके अलावा 35 एमजीडी क्षमता का नया एसटीपी लगभग 918 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगा। वहीं, 10 मौजूदा एसटीपी में 274 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक स्लज प्रबंधन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दिल्ली गेट ड्रेन के इन-सीटू ट्रीटमेंट के लिए 65 करोड़ रुपये की परियोजना भी स्वीकृत की गई है।