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दिल्ली दंगा साजिश मामला: अथर खान की जमानत पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
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बचाव पक्ष ने सबूतों पर उठाए सवाल, पुलिस ने गंभीरता और गवाहों के बयानों का हवाला दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी अथर खान की जमानत याचिका पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने आरोपी और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में अथर खान की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि सुरक्षित गवाह ‘प्लूटो’ के बयान में विरोधाभास हैं और उसने कुछ दिनों के भीतर अपना बयान बदल लिया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अथर खान के खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे उसकी सक्रिय भूमिका साबित हो सके। वकील ने कहा कि उसके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ। साथ ही, व्हाट्सएप संदेशों से केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात सामने आती है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि इसी मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, जबकि उनकी भूमिका अधिक गंभीर बताई गई थी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अथर खान की पिछली जमानत याचिका सितंबर 2025 में खारिज हो चुकी है।
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अभियोजन ने सुरक्षित गवाहों और व्हाट्सएप संदेशों को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया। पुलिस ने कहा कि दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी, इसलिए मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। फिलहाल निचली अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया जारी है।
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी अथर खान की जमानत याचिका पर मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने आरोपी और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में अथर खान की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि सुरक्षित गवाह ‘प्लूटो’ के बयान में विरोधाभास हैं और उसने कुछ दिनों के भीतर अपना बयान बदल लिया था। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अथर खान के खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे उसकी सक्रिय भूमिका साबित हो सके। वकील ने कहा कि उसके पास से कोई हथियार या आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ। साथ ही, व्हाट्सएप संदेशों से केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात सामने आती है।
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बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि इसी मामले में आरोपी गुलफिशा फातिमा को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, जबकि उनकी भूमिका अधिक गंभीर बताई गई थी। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अथर खान की पिछली जमानत याचिका सितंबर 2025 में खारिज हो चुकी है।
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