सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi World Book Fair: Release of the story and suffering of soldiers' wives on the first day

World Book Fair: पहले दिन सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा का विमोचन, कुडोपाली की गाथा का 13 भाषाओं में अनावरण

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 11 Jan 2026 03:28 AM IST
विज्ञापन
सार

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम, लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय को याद किया गया।

Delhi World Book Fair: Release of the story and suffering of soldiers' wives on the first day
साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित कविता पाठ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

पुस्तक मेले के पहले दिन प्रभात प्रकाशन के कार्यक्रम में लेखिका वंदना यादव की किताब सैनिक पत्नियों की कथा और व्यथा का विमोचन हुआ। यह किताब सैनिक परिवारों, खासकर सैनिक पत्नियों के संघर्ष, त्याग और जज्बे को सामने लाती है। लेखिका ने कहा, सैनिक बनना मिडिल क्लास का फैसला होता है, जहां देशभक्ति सबसे ऊपर होती है। यह किताब सच्ची कहानियों को उजागर करती है। परिचर्चा में मिलिंद सुधाकर न्यास, कर्नल मलिक, विशाल दुबे मौजूद रहे। 

Trending Videos


सैन्य इतिहास, शौर्य एवं प्रज्ञा थीम
पुस्तक मेले की थीम भारतीय सैन्य इतिहास, शौर्य एवं प्रज्ञा @75 रखी गई है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह प्रदर्शनी देश के सैनिकों को समर्पित है और सरदार वल्लभभाई पटेल के बलिदान और वंदे मातरम् के सम्मान को स्मरण करती है। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्कूली शिक्षा और भारतीय भाषाओं के लिए नए अवसर खोल रही है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी ने शिक्षा के पूरे प्रारूप को बदल दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विचारशील पीढ़ी का  निर्माण चाहते हैं पीएम : शिक्षा मंत्री
धर्मेंद्र प्रधान ने पुस्तक मेले के संदर्भ में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पढ़ने की  संस्कृति को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना केवल ढांचागत विकास या टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जागरूक, विचारशील और पढ़ने-सोचने वाली पीढ़ी के निर्माण पर आधारित है। वह हमेशा कहते हैं, पढ़ोगे, तो नेतृत्व करोगे।  

साहित्य अकादेमी के दो कार्यक्रम आयोजित
विश्व पुस्तक मेला 2026 के अंतर्गत शनिवार को साहित्य अकादेमी की तरफ से दो कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ एवं ‘कविता-पाठ’ हॉल संख्या-2 स्थित ‘लेखक मंच’ पर आयोजित किए गए। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी की प्रख्यात लेखिका अनामिका और असमिया की चर्चित लेखिका अनुराधा शर्मा पुजारी ने भाग लिया। दोनों लेखिकाओं ने पाठकों के साथ अपनी रचना-प्रक्रिया साझा करते हुए अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। अनामिका ने कहा, कि अपने बारे में बात करना विशेष रूप से कस्बाई परिवेश की स्त्री के लिए आसान नहीं होता। उन्होंने स्त्री के स्वभाव से जोड़ते हुए कहा कि कविता इशारों में बोलती है। 

किस हॉल में क्या है

  • एम्फीथिएटर–1: सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • हॉल 2: भारतीय भाषाओं के प्रकाशक और लेखक मंच
  • हॉल 3: भारतीय भाषा प्रकाशक और नई दिल्ली राइट्स टेबल
  • हॉल 4: गेस्ट ऑफ ऑनर देश, फोकस देश और अंतरराष्ट्रीय पवेलियन
  • हॉल 5: थीम पवेलियन, ऑथर्स कॉर्नर और सामान्य, व्यावसायिक प्रकाशक
  • हॉल 6: बाल मंडपम और शैक्षिक, मानविकी व आध्यात्मिक पुस्तकें

नक्षत्र प्रदर्शनी में ज्योतिष, वैदिक विज्ञान और आस्था एक साथ
भारत मंडपम में नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के साथ लगी नक्षत्र प्रदर्शनी भी लोगों के लिए खास आकर्षण बनी है। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) और फ्यूचर पॉइंट ने ये आयोजन किया है। शनिवार को सांसद मनोज तिवारी ने इसका उद्घाटन किया। नक्षत्र प्रदर्शनी में ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु, टैरो, हस्तरेखा और तंत्र विद्या के देशभर के विद्वान शामिल हैं।

कुडोपाली की गाथा का 13 भाषाओं में विमोचन
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक गुमनाम, लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय को याद किया गया। इस मौके पर ओडिशा के संबलपुर जिले के कुदोपली में हुए ऐतिहासिक विद्रोह पर आधारित पुस्तक द सागा ऑफ कुदोपली-द अनसंग स्टोरी ऑफ 1857 के 13 संस्करणों का लोकार्पण हुआ। यह किताब बांग्ला, पंजाबी, असमिया, मलयालम, उर्दू, मराठी, तमिल, कन्नड़, तेलुगु और स्पेनिश सहित नौ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित हुई है। इससे पहले यह हिंदी, अंग्रेजी और ओड़िया में उपलब्ध थी। अब यह कुल 13 भाषाओं में पाठकों तक पहुंचेगी। किताब का लोकार्पण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया।

इस अवसर पर कतर के भारत में राजदूत मोहम्मद हसन जबिर अल जबिर, कतर के संस्कृति मंत्री अब्दुल रहमान बिन हमद बिन जासिम बिन हमद अल थानी, स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्तासुन डोमेनेक, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी, आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल, कार्यकारी निदेशक प्रेमजीत लाल और एनबीटी के निदेशक व विश्व पुस्तक मेले के सीईओ युवराज मलिक मौजूद रहे। 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि ये किताब भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अध्याय को सामने लाती है, जिसे इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका। ओडिशा के संबलपुर जिले के कुदोपली में वीर सुरेन्द्र साईं और स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के नेतृत्व में शुरू हुआ यह विद्रोह कोई क्षणिक घटना नहीं थी, बल्कि एक लंबा गुरिल्ला आंदोलन था। यह आंदोलन 1827 से 1862 तक चला और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ सबसे लंबे सशस्त्र प्रतिरोधों में गिना जाता है। दमन, गिरफ्तारियों और निर्वासन के बावजूद यह संघर्ष पीढ़ियों तक जारी रहा। द सागा ऑफ कुदोपली उन गुमनाम नायकों की कहानी कहती है, जिनका बलिदान समय के साथ भुला दिया गया था। बहुभाषी प्रकाशन से यह कहानी देश और दुनिया तक पहुंचेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed