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Delhi NCR News: साहित्यिक पत्रकारिता की भूमिका पर मंथन
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नई दिल्ली । द्वारका स्थित साहित्य परिक्रमा कार्यालय में हुए साहित्यिक पत्र-पत्रिका संवाद में साहित्यिक पत्रकारिता की भूमिका, परंपरा और चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ। इसका आयोजन हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने पर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता ने हिंदी साहित्य को नई पहचान दी और रिपोर्ताज जैसी विधाओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पंडित जुगल किशोर शुक्ल, भारतेन्दु हरिश्चंद्र और आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि समालोचक, दिनमान, धर्मयुग और साप्ताहिक हिंदुस्तान जैसी पत्रिकाओं ने साहित्य और समाज दोनों को व्यापक मंच दिया।
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाएं नए लेखकों को अवसर प्रदान करती हैं और समाज को दिशा देने में सहायक होती हैं। कार्यक्रम में डिजिटल युग में साहित्यिक पत्रकारिता की प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। संवाद
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष डॉ. विनोद बब्बर ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाएं नए लेखकों को अवसर प्रदान करती हैं और समाज को दिशा देने में सहायक होती हैं। कार्यक्रम में डिजिटल युग में साहित्यिक पत्रकारिता की प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई। संवाद
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