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Delhi NCR News: नाले की गाद सड़क पर छोड़ी, कूड़ा-मलबा डालकर बना दिया कचरे का पहाड़
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-ताहिरपुर रोड पर सफाई के बाद नहीं उठी गाद, नाले में जमा है प्लास्टिक और निर्माण मलबा; बारिश में जलभराव का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ताहिरपुर रोड पर नाले की सफाई व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई जब पड़ताल में नाले से निकाली गई गाद सड़क किनारे ही पड़ी नजर आई। नाले से निकाली गई गाद के ऊपर आसपास से कूड़ा और निर्माण मलबा भी जमा होता जा रहा है। कई जगह नाले के भीतर ही प्लास्टिक, घरेलू कचरा, ईंट-पत्थर और अन्य मलबा पड़ा है। ऐसे में सवाल है कि बारिश के दौरान पानी की निकासी कैसे होगी।
सफाई के बाद गंदगी ने बढ़ाई परेशानी : नाले की सफाई का उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को बेहतर करना है, लेकिन यहां सफाई के बाद निकली गाद ही सड़क पर छोड़ दी गई। स्थानीय लोगों के लिए यह दोहरी परेशानी बन गई है। एक तरफ नाले में कचरा जमा है, दूसरी तरफ निकली गाद और मलबे का ढेर सड़क के किनारे पड़ा है। गीली गाद से बदबू और फिसलन का खतरा बना हुआ है। वाहनों के गुजरने पर मलबा सड़क तक फैल रहा है। वहीं पैदल राहगीरों को भी सड़क के किनारे से गुजरने में परेशानी हो रही है।
नाले में फिर डाला जा रहा कूड़ा-मलबा : नाले के आसपास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, कागज, कपड़े, घरेलू कचरा और निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। इससे साफ है कि सफाई के बावजूद नाले में दोबारा कूड़ा डाला जा रहा है। निर्माण मलबा और ठोस कचरा नाले में जाने से जल निकासी की क्षमता प्रभावित हो सकती है। बारिश तेज होने पर पानी का बहाव रुकने से सड़क और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
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गाद नहीं उठी तो फिर नाले में जाएगी : सड़क किनारे पड़ी गाद और मलबे को समय पर नहीं हटाया गया तो बारिश के दौरान यह बहकर दोबारा नाले में पहुंच सकता है। ऐसे में जिस नाले की सफाई पर मेहनत की गई, वह फिर कचरे और गाद से भर जाएगा। इससे सफाई अभियान की पूरी कवायद पर सवाल उठेंगे।
स्थानीय लोगों ने की कर्रवाई की मांग : स्थानीय निवासी विनोद मेहता व कुलवंत राणा ने कहा कि नाले की सफाई सिर्फ गाद निकालने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सफाई के बाद निकली गाद और कचरे को भी तत्काल हटाया जाना चाहिए। सड़क किनारे पड़े मलबे को उठाने के साथ नाले में कूड़ा डालने वालों पर कार्रवाई की जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ताहिरपुर रोड पर नाले की सफाई व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई जब पड़ताल में नाले से निकाली गई गाद सड़क किनारे ही पड़ी नजर आई। नाले से निकाली गई गाद के ऊपर आसपास से कूड़ा और निर्माण मलबा भी जमा होता जा रहा है। कई जगह नाले के भीतर ही प्लास्टिक, घरेलू कचरा, ईंट-पत्थर और अन्य मलबा पड़ा है। ऐसे में सवाल है कि बारिश के दौरान पानी की निकासी कैसे होगी।
सफाई के बाद गंदगी ने बढ़ाई परेशानी : नाले की सफाई का उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को बेहतर करना है, लेकिन यहां सफाई के बाद निकली गाद ही सड़क पर छोड़ दी गई। स्थानीय लोगों के लिए यह दोहरी परेशानी बन गई है। एक तरफ नाले में कचरा जमा है, दूसरी तरफ निकली गाद और मलबे का ढेर सड़क के किनारे पड़ा है। गीली गाद से बदबू और फिसलन का खतरा बना हुआ है। वाहनों के गुजरने पर मलबा सड़क तक फैल रहा है। वहीं पैदल राहगीरों को भी सड़क के किनारे से गुजरने में परेशानी हो रही है।
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नाले में फिर डाला जा रहा कूड़ा-मलबा : नाले के आसपास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, कागज, कपड़े, घरेलू कचरा और निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। इससे साफ है कि सफाई के बावजूद नाले में दोबारा कूड़ा डाला जा रहा है। निर्माण मलबा और ठोस कचरा नाले में जाने से जल निकासी की क्षमता प्रभावित हो सकती है। बारिश तेज होने पर पानी का बहाव रुकने से सड़क और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
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गाद नहीं उठी तो फिर नाले में जाएगी : सड़क किनारे पड़ी गाद और मलबे को समय पर नहीं हटाया गया तो बारिश के दौरान यह बहकर दोबारा नाले में पहुंच सकता है। ऐसे में जिस नाले की सफाई पर मेहनत की गई, वह फिर कचरे और गाद से भर जाएगा। इससे सफाई अभियान की पूरी कवायद पर सवाल उठेंगे।
स्थानीय लोगों ने की कर्रवाई की मांग : स्थानीय निवासी विनोद मेहता व कुलवंत राणा ने कहा कि नाले की सफाई सिर्फ गाद निकालने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सफाई के बाद निकली गाद और कचरे को भी तत्काल हटाया जाना चाहिए। सड़क किनारे पड़े मलबे को उठाने के साथ नाले में कूड़ा डालने वालों पर कार्रवाई की जाए।