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Delhi NCR News: डूसू को 18 साल से महिला चेहरे का इंतजार, 2008 के बाद नहीं मिली जीत
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-अध्यक्ष पद पर आधी आबादी की चमक पड़ी फीकी
कभी लगातार चार वर्षों तक दिखा था गर्ल पावर का दबदबा, प्रमुख संगठनों ने महिला प्रत्याशियों पर जताया भरोसा, लेकिन जीत नहीं मिली
रश्मि शर्मा
नई दिल्ली।दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में वर्ष 2008 के बाद से कोई छात्रा अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी है। कभी डूसू की राजनीति में छात्राओं का दबदबा रहा था, लेकिन पिछले 18 वर्षों में अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी और जीत, दोनों ही सीमित हो गई हैं। एनएसयूआई और एबीवीपी जैसे प्रमुख छात्र संगठन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद पर छात्राओं को मौका देते रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष पद पर महिला प्रत्याशी जीत का करिश्मा नहीं दिखा पा रही हैं। बीते वर्ष एनएसयूआई ने इस रुझान को बदलने के लिए एक छात्रा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उसे जीत नहीं मिल सकी।
डूसू के इतिहास में एक दौर ऐसा भी रहा है, जब छात्राओं ने लगातार चार वर्षों तक अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी। डूसू चुनाव में एनएसयूआई, एबीवीपी, आइसा, एसएफआई और अन्य वामपंथी संगठन उम्मीदवार उतारते हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला आमतौर पर एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच ही रहता है। वर्ष 2007 में एनएसयूआई की अमृता बाहरी अध्यक्ष पद पर काबिज हुई थीं। इसके अगले वर्ष 2008 में एबीवीपी की नुपुर शर्मा ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इसके बाद एनएसयूआई ने लंबे समय तक अध्यक्ष पद के लिए किसी छात्रा को टिकट नहीं दिया। वर्ष 2019 में संगठन ने इस रणनीति में बदलाव करते हुए चेतना त्यागी को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह एबीवीपी के अक्षित दहिया से चुनाव हार गईं।
वर्ष 2025 में भी एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर छात्रा को मैदान में उतारकर ‘गर्ल पावर’ पर दांव लगाया, लेकिन डूसू की सत्ता हासिल नहीं कर सकी। वहीं, वर्ष 2011 में एबीवीपी ने नेहा सिंह को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले एबीवीपी अध्यक्ष पद पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर जीत हासिल कर चुका था।
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आइसा ने नहीं बदली रणनीति
वामपंथी छात्र संगठन आइसा की रणनीति इस मामले में अलग रही है। पिछले 12 वर्षों में वर्ष 2018 को छोड़कर संगठन ने अध्यक्ष पद के लिए छात्राओं को ही उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, इनमें से कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सकी।
अध्यक्ष पद पर कब-कब कौन जीता
वर्ष नाम
2005 रागिनी नायक
2006 अमृता धवन
2007 अमृता बाहरी
2008 नूपुर शर्मा
2009 मनोज चौधरी
2010 जितेंद्र चौधरी
2011 अजय चिकारा
2012 अरुण हुड्डा
2013 अमन अवाना
2014 मोहित नागर
2015 सतेंद्र अवाना
2016 अमित तंवर
2017 रॉकी तुशीद
2018 अंकिव बसोया, शक्ति सिंह
2019 अक्षित दहिया
2023 तुषार डेढ़ा
2024 रौनक खत्री
2025 आर्यन मान
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कभी लगातार चार वर्षों तक दिखा था गर्ल पावर का दबदबा, प्रमुख संगठनों ने महिला प्रत्याशियों पर जताया भरोसा, लेकिन जीत नहीं मिली
रश्मि शर्मा
नई दिल्ली।दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में वर्ष 2008 के बाद से कोई छात्रा अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी है। कभी डूसू की राजनीति में छात्राओं का दबदबा रहा था, लेकिन पिछले 18 वर्षों में अध्यक्ष पद पर उनकी दावेदारी और जीत, दोनों ही सीमित हो गई हैं। एनएसयूआई और एबीवीपी जैसे प्रमुख छात्र संगठन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पद पर छात्राओं को मौका देते रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष पद पर महिला प्रत्याशी जीत का करिश्मा नहीं दिखा पा रही हैं। बीते वर्ष एनएसयूआई ने इस रुझान को बदलने के लिए एक छात्रा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उसे जीत नहीं मिल सकी।
डूसू के इतिहास में एक दौर ऐसा भी रहा है, जब छात्राओं ने लगातार चार वर्षों तक अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी। डूसू चुनाव में एनएसयूआई, एबीवीपी, आइसा, एसएफआई और अन्य वामपंथी संगठन उम्मीदवार उतारते हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला आमतौर पर एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच ही रहता है। वर्ष 2007 में एनएसयूआई की अमृता बाहरी अध्यक्ष पद पर काबिज हुई थीं। इसके अगले वर्ष 2008 में एबीवीपी की नुपुर शर्मा ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। इसके बाद एनएसयूआई ने लंबे समय तक अध्यक्ष पद के लिए किसी छात्रा को टिकट नहीं दिया। वर्ष 2019 में संगठन ने इस रणनीति में बदलाव करते हुए चेतना त्यागी को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह एबीवीपी के अक्षित दहिया से चुनाव हार गईं।
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वर्ष 2025 में भी एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर छात्रा को मैदान में उतारकर ‘गर्ल पावर’ पर दांव लगाया, लेकिन डूसू की सत्ता हासिल नहीं कर सकी। वहीं, वर्ष 2011 में एबीवीपी ने नेहा सिंह को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले एबीवीपी अध्यक्ष पद पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारकर जीत हासिल कर चुका था।
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आइसा ने नहीं बदली रणनीति
वामपंथी छात्र संगठन आइसा की रणनीति इस मामले में अलग रही है। पिछले 12 वर्षों में वर्ष 2018 को छोड़कर संगठन ने अध्यक्ष पद के लिए छात्राओं को ही उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, इनमें से कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सकी।
अध्यक्ष पद पर कब-कब कौन जीता
वर्ष नाम
2005 रागिनी नायक
2006 अमृता धवन
2007 अमृता बाहरी
2008 नूपुर शर्मा
2009 मनोज चौधरी
2010 जितेंद्र चौधरी
2011 अजय चिकारा
2012 अरुण हुड्डा
2013 अमन अवाना
2014 मोहित नागर
2015 सतेंद्र अवाना
2016 अमित तंवर
2017 रॉकी तुशीद
2018 अंकिव बसोया, शक्ति सिंह
2019 अक्षित दहिया
2023 तुषार डेढ़ा
2024 रौनक खत्री
2025 आर्यन मान