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Faridabad News: नूंह में विश्वविद्यालय को लेकर असमंजस
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-मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद रिकॉर्ड में नहीं मिला जिक्र
– वर्षों पुरानी है मांग, घोषणा के बाद भी आगे नहीं बढ़ा काम
-सांसद, सीएम व शिक्षा मंत्री से गुहार लगा चुके हैं स्थानीय लोग
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात क्षेत्र के लिए लंबे समय से उठ रही विश्वविद्यालय की मांग एक बार फिर असमंजस में फंसती नजर आ रही है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री द्वारा विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक न तो इस पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही यह घोषणा सरकार के आधिकारिक सीएम घोषणाओं के रिकॉर्ड में दिखाई दे रही है। ऐसे में जिले के लोगों में इस मुद्दे को लेकर निराशा और भ्रम की स्थिति बन गई है।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना मेवात क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन घोषणा के बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ने से लोगों में सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सांसद, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से कर चुके हैं मुलाकात :
विश्वविद्यालय की मांग को लेकर मेवात के कई प्रतिनिधिमंडल पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय मंत्री व सांसद राव इंद्रजीत सिंह, मुख्यमंत्री और प्रदेश के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा से मुलाकात कर चुके हैं। इन मुलाकातों में नूंह में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने सरकार को बताया कि जिले में उच्च शिक्षा के सीमित साधन होने के कारण छात्रों को पढ़ाई के लिए गुरुग्राम, पलवल, फरीदाबाद या दिल्ली का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
मेवात की दशकों पुरानी मांग :
दरअसल मेवात क्षेत्र में विश्वविद्यालय की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग पिछले कई दशकों से लगातार उठती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिले में विश्वविद्यालय स्थापित हो जाता है तो न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
कांग्रेस सरकार में भी उठी थी मांग :
पूर्व में कांग्रेस सरकार के समय भी मेवात में एमडीयू का रीजनल सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी। उस समय इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
घोषणा के बाद भी नहीं हुआ अमल :
मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि नूंह में जल्द विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा । उस समय इसे मेवात के लिए एक बड़ी घोषणा माना गया था। लेकिन अब तक न तो भूमि चयन, बजट या योजना को लेकर कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही यह घोषणा मुख्यमंत्री की आधिकारिक घोषणाओं की सूची में दर्ज दिखाई दे रही है।
शिक्षा के लिहाज से पिछड़ा जिला :
नूंह जिला पहले से ही शिक्षा के मामले में प्रदेश के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। यहां उच्च शिक्षा के सीमित संसाधन हैं और अधिकांश कॉलेज भी कम संख्या में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां विश्वविद्यालय की स्थापना होती है तो इससे जिले के हजारों छात्रों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उच्च शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
क्षेत्र के लोगों की सरकार से अपील :
मेवात के सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने सरकार से मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को औपचारिक रूप से सीएम घोषणाओं में शामिल कर जल्द से जल्द विश्वविद्यालय स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को इसका लाभ मिल सके।
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– वर्षों पुरानी है मांग, घोषणा के बाद भी आगे नहीं बढ़ा काम
-सांसद, सीएम व शिक्षा मंत्री से गुहार लगा चुके हैं स्थानीय लोग
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात क्षेत्र के लिए लंबे समय से उठ रही विश्वविद्यालय की मांग एक बार फिर असमंजस में फंसती नजर आ रही है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री द्वारा विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक न तो इस पर कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही यह घोषणा सरकार के आधिकारिक सीएम घोषणाओं के रिकॉर्ड में दिखाई दे रही है। ऐसे में जिले के लोगों में इस मुद्दे को लेकर निराशा और भ्रम की स्थिति बन गई है।
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की स्थापना मेवात क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन घोषणा के बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ने से लोगों में सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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सांसद, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से कर चुके हैं मुलाकात :
विश्वविद्यालय की मांग को लेकर मेवात के कई प्रतिनिधिमंडल पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय मंत्री व सांसद राव इंद्रजीत सिंह, मुख्यमंत्री और प्रदेश के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा से मुलाकात कर चुके हैं। इन मुलाकातों में नूंह में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने सरकार को बताया कि जिले में उच्च शिक्षा के सीमित साधन होने के कारण छात्रों को पढ़ाई के लिए गुरुग्राम, पलवल, फरीदाबाद या दिल्ली का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
मेवात की दशकों पुरानी मांग :
दरअसल मेवात क्षेत्र में विश्वविद्यालय की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग पिछले कई दशकों से लगातार उठती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिले में विश्वविद्यालय स्थापित हो जाता है तो न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
कांग्रेस सरकार में भी उठी थी मांग :
पूर्व में कांग्रेस सरकार के समय भी मेवात में एमडीयू का रीजनल सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी। उस समय इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
घोषणा के बाद भी नहीं हुआ अमल :
मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि नूंह में जल्द विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा । उस समय इसे मेवात के लिए एक बड़ी घोषणा माना गया था। लेकिन अब तक न तो भूमि चयन, बजट या योजना को लेकर कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही यह घोषणा मुख्यमंत्री की आधिकारिक घोषणाओं की सूची में दर्ज दिखाई दे रही है।
शिक्षा के लिहाज से पिछड़ा जिला :
नूंह जिला पहले से ही शिक्षा के मामले में प्रदेश के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। यहां उच्च शिक्षा के सीमित संसाधन हैं और अधिकांश कॉलेज भी कम संख्या में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां विश्वविद्यालय की स्थापना होती है तो इससे जिले के हजारों छात्रों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उच्च शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।
क्षेत्र के लोगों की सरकार से अपील :
मेवात के सामाजिक संगठनों और शिक्षाविदों ने सरकार से मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को औपचारिक रूप से सीएम घोषणाओं में शामिल कर जल्द से जल्द विश्वविद्यालय स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को इसका लाभ मिल सके।