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Faridabad News: पुलिस के डर से 10 फीट गहरा गड्ढा कर दफना दी थीं दवाएं

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 01:31 AM IST
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Fearing the police, the medicines were buried in a 10-foot-deep pit.
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जेसीबी से खोदकर निकाली दवाएं, 100 एमआरपी की दवाएं 30 पैसे में हो रहीं थी तैयार
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पिछले कुछ ही दिनों में शिवम, मयंक और मोहित ने पांच करोड़ रुपये की दवाएं की सप्लाई
शुजात आलम
नई दिल्ली। नकली दवाएं बनाकर बेचने के आरोप में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सबसे पहले निखिल अरोड़ा उर्फ सन्नी को दबोचा। इससे पूछताछ के बाद टीम आरोपी शिवम त्यागी के घर पहुंची तो वहां पुलिस को कुछ नहीं बरामद हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर शिवम ने बताया कि पुलिस के डर से उसने करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर दवाओं को दफना दिया है। टीम ने जेसीबी मशीन के जरिये शिवम की बताई जगह पर खुदाई कराई तो करीब 40 हजार टैबलेट और कैप्सूल दफन मिले।
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी निखिल अरोड़ा का भागीरथ पैलेस में थोक में दवा बेचने का पुराना कारोबार है। वह लभभग सभी नामी कंपनियों की दवाएं बेचता था। निखिल ने खुलासा किया है कि वह पिछले कई सालों से शिवम, मयंक और मोहित के संपर्क में था। यह तीनों ही उसे दवाएं सप्लाई करते थे। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपियों ने खुलासा किया है कि 100 रुपये एमआरपी की दवा बनाने में महज 30 पैसे का खर्चा आता है। बाद में इन दवाओं को एमआरपी के 20 से 25 फीसदी कीमत पर होलसेलर को बेच दिया जाता था। इस तरह मोटा मुनाफा कमाया जाता था। जांच के दौरान आरोपियों ने बताया है कि वह लगभग सभी कंपनियों की दवा बनाकर बेचते थे।
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मयंक अग्रवाल के खिलाफ पहले भी दो मामले दर्ज...

पुलिस की छानबीन में पता चला है कि आरोपी मयंक अग्रवाल के खिलाफ पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने वर्ष 2013 में मामला दर्ज किया थज्ञ। इसके बाद मुरादनगर, गाजियाबाद में जनवरी 2026 में एक और मामला दर्ज किया था। आरोपी मयंक लगातार नकली दवा बेचने के मामलों में शामिल रहा है। पुलिस इनके बाकी नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
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एक से डेढ़ लाख में उपलब्ध कराते थे फर्जी कंपनियां...

पुलिस की पूछताछ में आरोपी राहुल और शाहरुख ने खुलासा किया है दवाओं को बेचने के लिए बनाने वाले बिल के लिए आरोपी फर्जी कंपनियां बनवाते थे। जितने मोटे बिल होते थे, उसके हिसाब से कंपनी की कीमत होती थी। आरोपी एक लाख से डेढ़ लाख रुपये में दवा कारोबारियों कंपनी बनाकर देते थे। फिलहाल दोनों के पास से करीब 150 फर्जी कंपनियों का पता चला है। राहुल ने खुलासा किया है कि फर्जी कंपनी इन लोगों को भी कोई दूसरा व्यक्ति 20 से 25 हजार में देता था। पुलिस इनके बाकी साथियों की तलाश कर रही है।
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