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Faridabad News: जल, जंगल और जमीन का संरक्षण बनेगा अरावली की हरियाली का आधार

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 12:51 AM IST
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The conservation of water, forests, and land will form the foundation of the Aravallis' greenery.
अरावली की फाइल फोटो
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विश्व पर्यावरण दिवस

सीसीटीवी निगरानी, चहारदीवारी, तालाब और चेक डैम निर्माण से बढ़ेगा वन क्षेत्र का संरक्षण
अतिक्रमण व अवैध गतिविधियों पर लगेगी रोक

नीरज धर पाण्डेय

फरीदाबाद। जिले में अरावली वन क्षेत्र के संरक्षण और विस्तार को लेकर वन विभाग ने बहुआयामी कार्ययोजना पर काम तेज कर दिया है। एक ओर जहां अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा दीवार बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीवों के लिए जल स्रोत विकसित कर प्राकृतिक आवास को मजबूत किया जा रहा है।
विभाग का उद्देश्य अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखते हुए वन क्षेत्र को अधिक समृद्ध और टिकाऊ बनाना है। अरावली वन क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण, अवैध निर्माण, कचरा डंपिंग और पेड़ों की कटाई की घटनाओं को देखते हुए वन विभाग निगरानी तंत्र को मजबूत करने जा रहा है। विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा वन भूमि की सीमाओं पर सुरक्षा दीवार बनाने का प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा है। बड़खल, सूरजकुंड रोड, अनंगपुर और मेवला महाराजपुर क्षेत्र में वन भूमि पर अवैध गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। विभाग का मानना है कि चहारदीवारी और कैमरों की मदद से अतिक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण होगा तथा जंगल में आग लगाने और कचरा फेंकने जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही वन क्षेत्र में जाने वाले कुछ अनधिकृत रास्तों को बंद करने की भी योजना है ताकि निर्माण सामग्री लेकर वाहन जंगल के भीतर प्रवेश न कर सकें।
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वन विभाग अरावली में वर्षा जल संरक्षण की दिशा में भी बड़े स्तर पर कार्य कर रहा है। पाली गांव के पास चेक डैम और बड़े तालाब का निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 70 मीटर लंबा, 46 मीटर चौड़ा और चार मीटर गहरा यह तालाब वर्षा जल को संचित करेगा। निर्माण कार्य का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। इसके अलावा वन क्षेत्र में कई छोटे कृत्रिम जल स्रोत भी विकसित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से बारिश का पानी व्यर्थ बहने से बचेगा, भू-जल स्तर में सुधार होगा और वन्यजीवों को पूरे वर्ष पानी उपलब्ध हो सकेगा।
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वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा नया आधार



अरावली वन क्षेत्र तेंदुआ, नीलगाय, हिरण, सियार और अन्य वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास है। गर्मियों में पानी की कमी के कारण कई बार वन्यजीव भोजन और जल की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच जाते हैं, जिससे सड़क हादसों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। नए तालाबों, चेक डैमों और प्राकृतिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार से वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। इससे उनके प्राकृतिक आवास को मजबूती मिलेगी और वन्यजीवों के शहरी क्षेत्रों की ओर भटकने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।



पर्यावरण संरक्षण के साथ वन क्षेत्र विस्तार पर जोर



वन विभाग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ अरावली के हरित क्षेत्र को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। वन क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक तालाबों की सफाई और पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि जल संरक्षण, अतिक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को एक साथ लागू करने से अरावली के पारिस्थितिक संतुलन को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी तथा वन क्षेत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकेगा।
वर्जन


वन क्षेत्र में अवैध निर्माण और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई स्थानों पर दीवार निर्माण से अतिक्रमण पर रोक लगाने में सफलता मिली है। अब संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है। साथ ही जल संरक्षण और वन्यजीवों के लिए स्थायी जल स्रोत विकसित करने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। -झलकार उयके, जिला वन अधिकारी
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